देश की Digital Economy को मिलेगी नई रफ्तार, Visakhapatnam में Reliance बनाएगा सबसे बड़ा डेटा सेंटर

विशाखापट्टनम में रिलायंस द्वारा 1.6 लाख करोड़ की लागत से बनने वाला डेटा सेंटर क्लस्टर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। चरणबद्ध तरीके से विकसित होने वाले इस 1.5 गीगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट का पहला चरण 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिससे क्लाउड और एआई तकनीक को मजबूती मिलेगी।
आज के समय में डेटा को नई अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जा रहा है, और इसी वजह से देश-विदेश की बड़ी कंपनियां डेटा सेंटर के क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। भारत में भी इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इसी कड़ी में अब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है, जो देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को नई दिशा दे सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक विशाल डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने की योजना बना रही है। बता दें कि इस परियोजना पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जो इसे देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में शामिल कर सकता है। इस क्लस्टर की कुल क्षमता लगभग 1.5 गीगावाट बताई जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
गौरतलब है कि यह प्रोजेक्ट चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएगी। पहले चरण में लगभग 500 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर तैयार किया जाएगा, जिसकी शुरुआत वर्ष 2028 तक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर इसे पूर्ण रूप दिया जाएगा। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन की मांग भी की है, जिसमें मुख्य डेटा सेंटर, केबल कनेक्टिविटी और जल प्रबंधन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
बताया जा रहा है कि पूरा डेटा सेंटर क्लस्टर विशाखापट्टनम के भोगपुरम हवाई अड्डे के पास विकसित किया जाएगा, जिससे कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कंपनी एक सौर ऊर्जा आधारित भंडारण प्रणाली भी स्थापित करेगी, ताकि ऊर्जा की जरूरतों को स्थायी और किफायती तरीके से पूरा किया जा सके।
गौरतलब है कि विशाखापट्टनम इस समय डेटा सेंटर हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। यहां पहले से ही कई बड़ी कंपनियां निवेश की घोषणा कर चुकी हैं, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार और तकनीकी विकास की संभावनाएं बढ़ रही हैं। राज्य सरकार भी अपनी नई नीतियों के जरिए निवेशकों को आकर्षित कर रही है, जिसमें कर में छूट और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े निवेश से भारत में डिजिटल सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्लाउड आधारित तकनीकों को मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह देश को वैश्विक डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है।
रिलायंस का यह कदम न केवल कंपनी के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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