Glasgow CWG: Gyaneshwari Yadav ने जीता Silver, वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार प्रदर्शन और पदकों की बढ़ी संख्या

राष्ट्रमंडल खेलों के भारोत्तोलन क्षेत्र में ज्ञानेश्वरी यादव और बिंद्यारानी देवी की उपलब्धि भारत के बढ़ते खेल ग्राफ का विश्लेषण करती है जहां खिलाड़ियों ने तकनीकी कौशल और मानसिक मजबूती का परिचय दिया है। एथलेटिक्स में लंबी कूद के फाइनल में मुरली श्रीशंकर का प्रवेश और मुक्केबाजों का क्वार्टर फाइनल तक का सफर भारतीय खेल प्रणाली के व्यवस्थित विकास और बहुआयामी कौशल को रेखांकित करता है। यह सफलता आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए भारत की पदक संभावनाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाती है।
ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार का दिन भारत के लिए खास रहा, जब भारोत्तोलन में दो पदक देश के खाते में आए। ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता, जबकि बिंद्यारानी देवी ने 58 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक हासिल कर भारत की झोली में एक और सफलता जोड़ दी है। इसके साथ ही एथलेटिक्स और मुक्केबाजी में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अगले दौर में जगह बनाकर पदक की उम्मीदों को मजबूत किया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार 23 वर्षीय ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया और व्यक्तिगत स्तर पर भी नए कीर्तिमान बनाए हैं।
महिला 53 किलोग्राम वर्ग का मुकाबला काफी रोमांचक रहा। नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला दिदीह ने कुल 206 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 93 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 113 किलोग्राम वजन उठाते हुए राष्ट्रमंडल और राष्ट्रमंडल खेलों दोनों के नए कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। मुकाबले के दौरान ज्ञानेश्वरी ने 111 किलोग्राम वजन उठाकर कुछ समय के लिए खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन दिदीह ने 113 किलोग्राम वजन उठाकर उसे पीछे छोड़ दिया है।
बता दें कि ज्ञानेश्वरी यादव का यह सफर संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता बिजली मिस्त्री हैं और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के खेल करियर का पूरा साथ दिया। ज्ञानेश्वरी पहले पावरलिफ्टिंग से जुड़ी थीं और उन्होंने ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू को अपनी प्रेरणा बताया है। उनका कहना है कि ग्लासगो में उनका सबसे बड़ा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था, जिसे उन्होंने हासिल कर लिया है।
इसके बाद महिला 58 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में बिंद्यारानी देवी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 112 किलोग्राम सहित कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। हालांकि क्लीन एंड जर्क के दो प्रयास असफल रहने के कारण वह स्वर्ण पदक की दौड़ में पीछे रह गईं। इस स्पर्धा में नाइजीरिया की राफियातु फोलाशादे लावल ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। गौरतलब है कि बिंद्यारानी देवी ने वर्ष 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 55 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था।
भारोत्तोलन में मिले इन पदकों के बाद भारत के खाते में इस खेल से चार पदक और कुल पांच पदक हो चुके हैं। वहीं एथलेटिक्स में मुरली श्रीशंकर ने पुरुष लंबी कूद के फाइनल में आसानी से जगह बना ली है। उन्होंने पहले ही प्रयास में 8.01 मीटर की छलांग लगाकर सीधे फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। गौरतलब है कि वह गंभीर घुटने की चोट के कारण पेरिस ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले सके थे और अब शानदार वापसी कर रहे हैं।
भारतीय खिलाड़ी लोकेश सत्यानाथन ने भी 7.77 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर शीर्ष 12 खिलाड़ियों में जगह बनाई और फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है। मुरली श्रीशंकर ने कहा कि ठंड, तेज हवा और बारिश के कारण परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन पहले ही प्रयास में फाइनल का टिकट हासिल करना उनके लिए संतोष की बात रही है। वहीं भारतीय मुक्केबाजों ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है, जिससे आने वाले दिनों में भारत के पदकों की उम्मीदें और मजबूत होती नजर आ रही हैं।
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