कॉजपा ने न्यायालय के आदेश में सरकारी आश्वासनों की अनदेखी का दावा किया, फिर से आंदोलन की चेतावनी दी

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां वापस नहीं ली गईं, तो वे फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। पार्टी का आरोप है कि उच्चतम न्यायालय के हालिया अंतरिम आदेश का इस्तेमाल छात्रों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। कॉजपा ने जंतर-मंतर पर अपना 36 दिनों का आंदोलन सरकार के आश्वासनों के बाद हाल ही में समाप्त किया था।
नयी दिल्ली, 28 जुलाई कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अगर सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां वापस लेने और किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करने के अपने वादे को पूरा नहीं किया, तो पार्टी फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय के हालिया अंतरिम आदेश को छात्रों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एक बयान में कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि पार्टी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश की निर्देश संख्या चार उस आश्वासन के खिलाफ है, जो केंद्र सरकार ने 36 दिन का आंदोलन खत्म कराने के लिए बातचीत के दौरान दिया था।
उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश की निर्देश संख्या चार में सरकारों को पहले से दर्ज प्राथमिकियां बरकरार रखने और जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। दास ने कहा, यह निर्देश 25 जुलाई को भारत सरकार की ओर से देश के युवाओं को दिए गए आश्वासन और गारंटी के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि प्राथमिकियां वापस ली जाएंगी और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉजपा ने सरकार के आश्वासन पर पूरे विश्वास के साथ अपना देशव्यापी आंदोलन वापस लिया था।
दास ने आरोप लगाया कि अब यह आशंका वाजिब है कि केंद्र और भाजपा शासित राज्य उच्चतम न्यायालय के आदेश का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले बरकरार रख सकते हैं। दास ने सवाल किया सरकारी वकीलों ने अंतरिम आदेश का विरोध क्यों नहीं किया, जबकि उन्हें पता था कि कॉजपा के साथ 25 जुलाई को ही समझौता हो चुका था। उन्होंने कहा, इसलिए अदालत का यह आदेश पूरी तरह स्वीकार्य नहीं है।
यह आदेश पूरी जानकारी के बिना दिया गया है। दास ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सरकारों को प्राथमिकियां बरकरार रखने का निर्देश नहीं दिया है, लिहाजा सरकार के पास अब भी मामलों को वापस लेने या उन्हें आगे न बढ़ाने का अधिकार है। दास ने कहा कि केंद्र सरकार अपने वादे से पीछे हटने के लिए अदालत के आदेश का हवाला न दे।
उन्होंने मांग की कि केंद्र और संबंधित भाजपा/राजग सरकारें 25 जुलाई को दिए गए आश्वासनों के बारे में उच्चतम न्यायालय को जानकारी दें, ताकि देश के युवाओं से किए गए वादों को लेकर पूरी पारदर्शिता बनी रहे। दास ने कहा कि सरकार के लिए आश्वासन पूरे करने की समय-सीमा मंगलवार को समाप्त हो गई। उन्होंने फिर दोहराया कि प्राथमिकियां वापस ली जाएं, भविष्य में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा दी जाए और सरकार अपने आश्वासनों को पूरी तरह व सही भावना के साथ लागू करे।
उन्होंने कहा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो कॉकरोच जनता पार्टी के पास छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इस बीच, ‘टायफाइड’ से पीड़ित कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पुलिस अब भी छात्रों को परेशान कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसपर रोक नहीं लगी, तो बहुत बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
दीपके ने कहा, अगर पुलिस छात्रों को परेशान करती रही, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगी। सरकार को छात्रों को निशाना बनाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगानी चाहिए।” कॉजपा ने जंतर-मंतर पर 36 दिन तक चला आंदोलन शनिवार को खत्म कर दिया था। पार्टी ने कहा था कि सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्राथमिकियां वापस लेने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बदले की कार्रवाई न करने और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विचार करने समेत प्रमुख मांगें मान ली हैं।
सोमवार को संगठन ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने, सभी आपराधिक मामले वापस लेने और यह लिखित आश्वासन देने की मांग की थी कि कोई नयी प्राथमिकियां दर्ज नहीं की जाएगी। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।
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