National Record तोड़ Anshuka Yadav ने Asian Games में ठोका दावा, 18 की उम्र में दिग्गजों को पछाड़ा

बागपत की किसान की बेटी अंशुका यादव ने गंभीर चोट से उबरने के बाद हैमर थ्रो में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया है। 18 वर्षीय इस एथलीट ने 67.02 मीटर के थ्रो के साथ न केवल एशियाई खेलों में अपनी जगह पक्की की, बल्कि अनुभवी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवाया।
शुरुआत से ही यह साफ दिख रहा था कि भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में महिला हैमर थ्रो प्रतियोगिता कुछ खास होने वाली है। एशियाई खेल 2026 के लिए क्वालिफिकेशन ट्रायल में देश की कई दिग्गज खिलाड़ी मैदान में थीं, लेकिन दिन खत्म होते-होते सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की 18 वर्षीय अंशुका यादव की होने लगी। उन्होंने न केवल नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स को भविष्य के लिए एक नई उम्मीद भी दे दी है।
बता दें कि कलिंगा स्टेडियम में आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल 11 महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम का चयन करना था। मैदान में 2022 एशियाई खेलों में सातवें स्थान पर रहने वाली तान्या चौधरी, दिल्ली की हर्षिता सहरावत, पंजाब की मनप्रीत कौर, राजस्थान की कुलविंदर और ओडिशा की दिव्या शांडिल्य जैसी अनुभवी खिलाड़ी भी मौजूद थीं। इसके बावजूद अंशुका ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंशुका ने पहले प्रयास में 62.07 मीटर का थ्रो कर बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 65.64 मीटर का थ्रो करते हुए वर्ष 2017 से सरिता सिंह के नाम दर्ज 65.25 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसी प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई खेल 2026 के लिए भी अपना स्थान लगभग तय कर लिया।
गौरतलब है कि अंशुका यहीं नहीं रुकीं। तीसरे प्रयास में उन्होंने 64.81 मीटर का थ्रो किया, जबकि चौथे प्रयास में 61.89 मीटर तक पहुंचीं। पांचवां प्रयास फाउल रहा, लेकिन अंतिम प्रयास में उन्होंने 67.02 मीटर का शानदार थ्रो कर अपना ही नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड फिर से बेहतर बना दिया। इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता में मौजूद सभी खिलाड़ियों और विशेषज्ञों को प्रभावित किया।
अंशुका उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बलेनी गांव से आती हैं। उनका परिवार खेती से जुड़ा हुआ है। उनके पिता सुशील यादव भी कभी हैमर थ्रो खिलाड़ी रहे, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें कम उम्र में खेल छोड़ना पड़ा। बाद में उन्होंने अपनी बेटी को इस खेल में आगे बढ़ाने का फैसला किया। अंशुका बताती हैं कि उनकी पहली पसंद दौड़ प्रतियोगिता थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने हैमर थ्रो अपनाया और आज उसी फैसले ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
उनकी सफलता की राह आसान नहीं रही। मार्च 2026 में खेत पर काम के दौरान एक दुर्घटना में उनके पैर और घुटने में गंभीर चोट लग गई थी। इस वजह से वह लगभग दो महीने तक अभ्यास भी नहीं कर सकीं। इसके बावजूद उन्होंने छोटे-छोटे अभ्यास जारी रखे और पूरी मेहनत के साथ वापसी की। यही कारण है कि चोट से उबरने के बाद राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना उनके लिए बेहद भावुक पल माना जा रहा हैं।
अंशुका ने प्रतियोगिता के बाद कहा कि भारत में अधिकतर लोग भाला फेंक प्रतियोगिता को जानते हैं, लेकिन हैमर थ्रो को अभी उतनी पहचान नहीं मिली हैं। उनका सपना है कि आने वाले समय में लोग इस खेल को भी उसी उत्साह से देखें और वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें।
गौरतलब है कि अंशुका का 67.02 मीटर का थ्रो पिछले एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता प्रदर्शन से भी बेहतर रहा हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन और कनाडा की खिलाड़ियों के रिकॉर्ड अभी काफी आगे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अंशुका की उम्र और तकनीकी क्षमता को देखते हुए आने वाले वर्षों में वह 70 मीटर से आगे का आंकड़ा भी पार कर सकती हैं। भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह उपलब्धि केवल एक नया रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी संभावनाओं का संकेत भी मानी जा रही है।
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