Europe Heatwave से जनता बेहाल, सड़कें और पटरियाँ पिघल रहीं, Fan और AC लूट रहे लोग, France में टूटा मौतों का रिकॉर्ड

Europe Heatwave
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हम आपको बता दें कि फ्रांस इस संकट का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 24 जून के बाद से वहां सामान्य से करीब 1000 अधिक मौतें दर्ज हुई हैं। सबसे अधिक असर उन इलाकों में देखा गया जहां रेड अलर्ट जारी किया गया था।

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की ऐसी मार झेल रहा है, जिसने जनजीवन, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा तंत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है। पिछले कुछ दिनों में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, चेक गणराज्य, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और इटली सहित कई देशों में तापमान ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि 21 जून के बाद से यूरोप में अत्यधिक तापमान के कारण 1300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें अकेले फ्रांस में लगभग 1000 अतिरिक्त मौतें सामने आई हैं और इनमें 85 प्रतिशत मृतकों की आयु 65 वर्ष से अधिक थीं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि के कारण कभी पीढ़ी में एक बार आने वाली भीषण गर्मी अब लगभग हर वर्ष देखने को मिल रही है। उन्होंने इसे “मूक हत्यारा” बताया, क्योंकि यूरोप के अधिकांश घर, दफ्तर और विद्यालय इतनी गर्मी के लिए तैयार नहीं हैं। संगठन ने यूरोपीय देशों से हीट हेल्थ एक्शन योजना लागू करने और स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाने की अपील की है।

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हम आपको बता दें कि फ्रांस इस संकट का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 24 जून के बाद से वहां सामान्य से करीब 1000 अधिक मौतें दर्ज हुई हैं। सबसे अधिक असर उन इलाकों में देखा गया जहां रेड अलर्ट जारी किया गया था। पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में घरों के भीतर हुई मौतों में तेज वृद्धि देखी गई है। एजेंसी ने कहा कि यह स्थिति समाज में अकेले रह रहे बुजुर्गों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

हम आपको बता दें कि फ्रांस में हालात इतने गंभीर हो गए कि अस्पतालों में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई। पेरिस के सरकारी अस्पतालों में लगातार दूसरे दिन लगभग 3000 लोग गर्मी से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए पहुंचे, जो सामान्य से लगभग एक तिहाई अधिक है। राजधानी के सभी 38 अस्पतालों में आपात योजना लागू करनी पड़ी। साथ ही चिकित्सकीय सहायता केंद्रों पर आने वाली कॉल में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

गर्मी ने केवल स्वास्थ्य सेवाओं को ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। जर्मनी में तेज गर्मी के कारण सड़कों की कंक्रीट की परतें फट गईं और कई राजमार्ग बंद करने पड़े। रेल सेवाएं बाधित हुईं और देश की रेल कंपनी ने गैरजरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी। फ्रांस में सड़कें पिघलने, बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और रेल सेवाओं में देरी की घटनाएं सामने आईं। स्विट्जरलैंड में नदी के पानी का तापमान बढ़ने से बेजनाउ परमाणु ऊर्जा संयंत्र के रिएक्टर अस्थायी रूप से बंद करने पड़े।

यूरोप के कई देशों में तापमान ने ऐतिहासिक रिकार्ड बनाए। जर्मनी में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि चेक गणराज्य में 41.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ब्रिटेन में जून का सबसे गर्म दिन दर्ज हुआ, जहां तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। डेनमार्क में 1874 के बाद का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। स्विट्जरलैंड के बासेल में 38.8 डिग्री सेल्सियस और स्पेन में 43.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। फ्रांस में औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो वहां के मौसम इतिहास में पहली बार हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन के बिना इतनी तीव्र और लगातार गर्मी लगभग असंभव थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है और आने वाले वर्षों में ऐसी हीटवेव और अधिक सामान्य हो सकती हैं।

साथ ही फ्रांस में 18 जून के बाद से कम से कम 74 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। अधिकतर हादसे बिना निगरानी वाले तालाबों, नदियों और झीलों में हुए, जहां लोग गर्मी से राहत पाने पहुंचे थे। ब्रिटेन में भी गर्मी के दौरान नदी और झीलों में डूबने से कई लोगों की जान गई। प्रशासन ने लोगों से असुरक्षित जलाशयों में जाने से बचने की अपील की है।

इटली में रोम, मिलान, फ्लोरेंस और वेनिस सहित 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी है। पर्यटक फव्वारों और छायादार स्थानों में राहत खोजते दिखाई दे रहे हैं। फ्रांस में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की गई, क्योंकि तेज धूप में शराब सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।

देखा जाये तो गर्मी ने यूरोप के आवासीय ढांचे की कमजोरियां भी उजागर कर दी हैं। अधिकांश यूरोपीय घर ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर बनाए गए थे और वहां वातानुकूलन व्यवस्था व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार यूरोप के केवल लगभग 20 प्रतिशत घरों में वातानुकूलन की सुविधा है। पुराने भवनों और ऐतिहासिक इमारतों में नए वातानुकूलन यंत्र यानि एसी लगाना कठिन और महंगा है।

इसी कारण पोर्टेबल वातानुकूलन यंत्रों की मांग अचानक बढ़ गई है। एशियाई कंपनियों को इसका बड़ा लाभ मिला है। सैमसंग, एलजी, मित्सुबिशी, मिडिया और ग्री जैसी कंपनियों ने यूरोप में बिक्री में तेज वृद्धि दर्ज की है। चीन से पश्चिमी यूरोप को पोर्टेबल वातानुकूलन यंत्रों का निर्यात 2026 के पहले पांच महीनों में 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया।

फ्रांस में तो वातानुकूलन यंत्रों एसी और पंखों की खरीद को लेकर कई स्थानों पर अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई। पेरिस के निकट ला डेफांस में एक दुकान खुलते ही सैकड़ों लोग सस्ते वातानुकूलन यंत्र खरीदने के लिए अंदर घुस पड़े। धक्का मुक्की में कई लोग घायल हो गए। इसी तरह की घटनाएं अन्य शहरों में भी सामने आईं। एक प्रमुख खुदरा कंपनी ने बताया कि उसने एक ही दिन में 30000 पंखे और वातानुकूलन यंत्र बेच दिए, जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग हजार गुना अधिक है।

बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि 2003 की विनाशकारी यूरोपीय हीटवेव की तुलना में इस बार तापमान कई स्थानों पर अधिक रहा है। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर तैयारी के कारण मौतों की संख्या उस स्तर तक पहुंचने से रोकी जा सकती है। फिर भी यह संकट स्पष्ट संकेत दे रहा है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का खतरा नहीं बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। यूरोप की यह भीषण गर्मी पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि यदि वैश्विक तापवृद्धि पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में ऐसी आपदाएं और अधिक व्यापक तथा घातक रूप ले सकती हैं।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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