West Bengal Cabinet ने नयी Industrial Policy को दी मंजूरी, शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर रोक

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पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में नया निवेश आकर्षित करने के लिए त्वरित स्वीकृति और आसान भूमि नियमों वाली औद्योगिक नीति को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 5 नवंबर को नबान्न से इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे। इसके साथ ही भविष्य में एसएससी के जरिए नियुक्त शिक्षकों के राजनीति में शामिल होने पर प्रतिबंध रहेगा।

पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्य की नयी औद्योगिक नीति को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य प्रोत्साहन, त्वरित स्वीकृति और भूमि आवंटन के नियमों में बदलाव के जरिए नया निवेश आकर्षित करना है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पांच नवंबर को राज्य सचिवालय नबान्न से औद्योगिक नीति के विवरण की औपचारिक घोषणा करेंगे। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘धनतेरस, दिवाली और काली पूजा नजदीक हैं।

यह हमारे लिए शुभ समय है। पांच नवंबर को सरकार के दो कार्यक्रम होंगे..राज्य की औद्योगिक नीति की घोषणा और किसानों के खातों में राशि भेजना।’’ मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वह पांच नवंबर को मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को वित्तीय सहायता हस्तांतरित करने के कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। शुभेंदु ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने वाले किसानों को अतिरिक्त तीन हजार रुपये भी देगी।

उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने यह भी फैसला किया है कि भविष्य में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के माध्यम से नियुक्त होने वाले शिक्षकों को सीधे राजनीति में हिस्सा लेने या चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रतिबंध केवल भविष्य में नियुक्त होने वाले शिक्षकों पर लागू होगा, और पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षक, जिनमें पंचायतों और नगरपालिकाओं में निर्वाचित पदों पर रहने वाले शिक्षक भी शामिल हैं, इसके दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘देश के किसी अन्य राज्य में शिक्षक सीधे राजनीति में शामिल नहीं होते हैं।

बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के उदाहरणों को देखते हुए हमने फैसला किया है कि पश्चिम बंगाल में भी शिक्षकों को अब सीधे राजनीति में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। आने वाले दिनों में एसएससी के माध्यम से नियुक्त होने वाले शिक्षक पंचायत, नगरपालिका, विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे और न ही सीधे राजनीति में शामिल हो सकेंगे।’’

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