Tripura में Jitendra Choudhury का केंद्र पर निशाना, EC और CBI जैसी संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप

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अगरतला में आयोजित ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली में माकपा नेता जितेंद्र चौधरी ने मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनावी लाभ सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा रहा है। इसी मंच से कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को अवैध बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

त्रिपुरा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार के 12 साल के शासन के दौरान निर्वाचन आयोग (ईसी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और न्यायपालिका समेत संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर कमजोर किया गया है। यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली को संबोधित करते हुए चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की चुनावी जीत सुनिश्चित करने के लिए सरकार देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जानते हैं कि यदि स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराए जाएं तो वे स्थानीय निकायों के चुनाव भी नहीं जीत पाएंगे।

इसीलिए वे निर्वाचन आयोग, सीबीआई और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया अपनाई है।’’ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘‘वोट चोर’’ की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव ने निर्वाचन आयोग को ‘‘भारत का वोट चोर आयोग’’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘इंडिया’ गठबंधन भारतीय लोकतंत्र की नींव संविधान और लोगों के मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन चला रहा है। लोगों को इसी उद्देश्य के लिए सड़कों पर उतरना चाहिए।’’ कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर भी निशाना साधा।

उन्होंने दावा किया कि कुमार खुद जानते हैं कि इस प्रक्रिया का मौजूदा प्रारूप ‘‘अवैध’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘इंडिया’ गठबंधन न केवल ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनकी गिरफ्तारी चाहता है, बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की पुरानी प्रक्रिया बहाल करने के पक्ष में भी है। लोगों का दबाव बढ़ने पर ज्ञानेश कुमार पद छोड़ देंगे और उनकी जगह कोई दूसरा ‘ज्ञानेश कुमार’ कार्यभार संभाल लेगा।

इसलिए हम नियुक्ति की पुरानी प्रक्रिया बहाल करना चाहते हैं, जिसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्ति समिति का हिस्सा हों।’’ रॉय बर्मन ने कहा कि उन्हें आशंका है कि एसआईआर के जरिये दो लाख से अधिक वैध मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जायेगा। राज्य में यह प्रक्रिया 12 दिसंबर से शुरू होने वाली है।

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