Shivraj Chouhan का बड़ा बयान: विवेकानंद के बाद Mohan Bhagwat ने रखा हिंदुत्व का असली सार

केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान ने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण को स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन के समकक्ष बताया है। उन्होंने कहा कि भागवत ने वैश्विक मंच पर हिंदुत्व के असली सार और भारत की शाश्वत जीवन-दृष्टि को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया, जो 'वसुधैव कुटुंबकम्' तथा विविधता में एकता पर केंद्रित है। यह भाषण भारतीय दर्शन के वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करता है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया भाषण की तुलना स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण से की है। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय दर्शन को पेश करने के उनके अंदाज़ की तारीफ़ की। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में चौहान ने कहा कि भागवत ने दुनिया के सामने "भारत की शाश्वत जीवन-दृष्टि" को सफलतापूर्वक रखा, जो पूरी सृष्टि की एकता और मानवता के कल्याण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बाद, अगर किसी ने भारतीय दर्शन और हिंदुत्व के असली सार को इतनी सरलता और स्पष्टता के साथ दुनिया के सामने पेश किया है, तो वे परम पूजनीय सरसंघचालक मोहन भागवत हैं।
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चौहान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भागवत के भाषण ने 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सब सुखी हों) जैसे पारंपरिक भारतीय सिद्धांतों को और मज़बूत किया। उन्होंने बताया कि हिंदुत्व विविधता को अपनाने का प्रतीक है, जिसका आधार आध्यात्मिक एकता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व कोई संकीर्ण विचारधारा नहीं है, बल्कि यह 'एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति', 'आत्मवत् सर्वभूतेषु', 'वसुधैव कुटुंबकम्', 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' और पूरी दुनिया के कल्याण की भावना में व्यक्त जीवन-दृष्टिकोण है। यह विविधता में एकता को अपनाने और पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर व्यवहार करने की भावना है।
प्राचीन ऋषियों और 'सिया राममय सब जग जानी' के सिद्धांत का हवाला देते हुए, जिसका अर्थ है समस्त सृष्टि में दैवीयता देखना, चौहान ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा पर प्रकाश डाला। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इस पर खुशी जताई जानी चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में 6,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता। उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने यह बात ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।
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