वर्ष 2024 में सड़क परिवहन प्रदूषण से भारत में हर छह मिनट में एक समय पूर्व मौत: रिपोर्ट

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारत में सड़क परिवहन प्रदूषण से हर छह मिनट में एक समय पूर्व मौत हुई। दिल्ली-एनसीआर में इसका असमान प्रभाव देखा गया, जहां बच्चों के अस्थमा के 23 प्रतिशत मामले सामने आए। शून्य उत्सर्जन वाहनों को अपनाकर 2050 तक 17 लाख मौतों को रोका जा सकता है।
नयी दिल्ली, 29 जुलाई भारत में सड़क परिवहन से होने वाला प्रदूषण जनस्वास्थ्य पर बड़ा बोझ डाल रहा है। वर्ष 2024 में इसके कारण हर छह मिनट में एक व्यक्ति की समय से पहले मौत हुई और हर 34 मिनट में बच्चों में अस्थमा का एक नया मामला सामने आया। यह जानकारी एक नयी रिपोर्ट से मिली।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) पर इसका असमान रूप से अधिक प्रभाव पड़ा है। देश की करीब पांच प्रतिशत आबादी वाले एनसीआर में बच्चों में सड़क परिवहन से जुड़े अस्थमा के कुल मामलों का 23 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है। ‘हेल्थ बेनिफिट्स ऑफ जीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट थ्रू 2050’ नामक यह रिपोर्ट इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) ने बुधवार को जारी की।
आईसीसीटी में वरिष्ठ शोधकर्ता और अध्ययन सह-लेखक लिंगझी जिन ने एक बयान में कहा, “बोझ काफी असमान है। भारत में सड़क परिवहन से जुड़े बच्चों के अस्थमा के करीब चौथाई मामले एनसीआर में हैं। ये वे बच्चे हैं जो अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान यातायात से होने वाले प्रदूषण के संपर्क में आते हैं।” विश्लेषण में भारत के परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में भारी वाहनों की बड़ी भूमिका को भी रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक और बसों की संख्या कुल वाहनों के मुकाबले कम होने के बावजूद वे वायु प्रदूषण में असमान रूप से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अनुसार वर्ष 2024 में भारत में सड़क परिवहन से होने वाले धुएं में भारी वाहनों की हिस्सेदारी नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) उत्सर्जन में 79 प्रतिशत और पीएम2.5 उत्सर्जन में 64 प्रतिशत रही। इसके अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए कम उत्सर्जन और शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को तेजी से अपनाने तथा नियामकीय उपायों के जरिए पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की जरूरत है।
विश्लेषण में कहा गया है कि इन उपायों को लागू करने से अब से वर्ष 2050 के बीच भारत में 17 लाख समयपूर्व मौतों को रोका जा सकता है। लिंगझी जिन ने कहा, “अधिक प्रदूषण वाले इन क्षेत्रों में शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों की ओर बदलाव तेज करना जनस्वास्थ्य की रक्षा के सबसे सीधे उपायों में से एक है।
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