Sawan 2026 Special: नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर खुलने वाले ये Unique Temples, जानें इनकी पौराणिक परंपराएं

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उज्जैन के नागचंद्रेश्वर और रायसेन के सोमेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए विख्यात हैं जो साल में केवल एक बार भक्तों के लिए खुलते हैं। नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर होने वाले इन विशेष दर्शनों का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि यहाँ की प्रतिमाएं और प्रवेश द्वार शेष वर्ष बंद रहते हैं। सावन के महीने में इन दुर्लभ तीर्थस्थलों की यात्रा और दर्शन से जुड़ी विस्तृत जानकारी श्रद्धालुओं हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।

श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। कल यानी 30 जुलाई 2026 से सावन का महीना शुरु होने जा रहा है। इस महीने का इंतजार शिवभक्त लंबे समय से करते हैं। देशभर के शिवालयों में भक्तों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिलती है। 

कुछ भक्तजन जलाभिषेक करने जाते हैं, तो कई लोग अपनी मनोकामना को लेकर भगवान भोलेनाथ के दरबार में पहुंच सकती हैं। क्या आप भी सावन में भगवान शिव के अनोखे मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।

भगवान शिव के अनोखे मंदिर

भारत में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जो अपनी अनोखी परंपराओं के लिए अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं में से दो मंदिर ऐसे हैं जिनके कपाट पूरे साल बंद रहते हैं। सिर्फ साल में एक बार इनके कपाट खोले जाते हैं। बता दें कि, एक मंदिर के कपाट सावन में खुलते हैं। दूसरे के कपाट भगवान शिव के ही खास त्योहार पर खोले जाते हैं। आइए आपको इन दोनों मंदिर के बारे में बताते हैं।

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला में स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में तीसरी मंजिल पर भगवान नागचंद्रेश्वर का भी मंदिर है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट सिर्फ साल में एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। जबकि पूरा साल यह मंदिर बंद रहता है।

क्यों है यह मंदिर इतना खास?

इस मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा है। यहां भगवान शिव नाग की शय्या पर हैं। ऐसी प्रतिमा बहुत कम जगह देखने को मिलती है। माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन करने और पूजा करने से भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मानते हैं सच्चे मन से प्रार्थना करने पर उनकी मनोकामनाएं जरुर पूर्ण होती हैं। वैसे इस मंदिर के दर्शन के कालसर्प दोष दूर हो जाता है।

कैसे पहुंचें उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर?

यहां जाने के लिए आपको उज्जैन पहुंचना होगा। सबसे पहले आप उज्जैन जंक्शन मेन रेलवे स्टेशन पहुंच जाए। वहां से मंदिर मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां से ऑटो या ई-रिक्शा आसानी से मिल जाएगा। फ्लाइट से आने के लिए आपको इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पर उतरना होगा, जो कि उज्जैन से करीब 53 किलोमीटर दूर है। यहां से आप बस या ट्रैक्सी लेकर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप बस या प्राइवेट कार से भी उज्जैन पहुंच सकते हैं। उज्‍जैन के नागचंद्रेश्वर मंदि‍र इस तरह पहुंच सकते हैं-

- नागचंद्रेश्वर मंद‍िर के ल‍िए आपको महाकाल मंदिर के लिए ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं।

 - महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सबसे ऊपरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर मौजूद है।

 - नागपंचमी के दौरान यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है। 

रायसेन का सोमेश्वर महादेव मंदिर

एमपी के रायसेन जिले की पहाड़ियों पर स्थित है सोमेश्वर महादेव मंदिर, जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर ऊंचाई पर बना हुआ और यहां पर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चढ़ाई करनी पड़ती है।

कब खुलते हैं सोमेश्वर महादेव मंदिर के कपाट?

यहां के लोकल के अनुसार, इस मंदिर के कपाट महाशिवरात्रि के दिन कुछ घंटों के लिए खोले जाते हैं। इसी समय भक्तजन पूजा और दर्शन के लिए आते हैं। वरना पूरे साल यह मंदिर बंद रहता है।

मंदिर बंद रहने पर भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

जब यह मंदिर बंद रहता है, तो तभी श्रद्धालु यहां आना नहीं छोड़ते है। लोग मंदिर के बाहर से ही भगवान शिव को प्रणाम करते हैं और अपनी श्रद्धा को दर्शाते हैं। यहां पर आने वाले कई श्रद्धालुओं अपनी मनोकामना मांगते समय मंदिर के प्रवेश द्वार पर कलावा बांधते हैं। कहा जाता है कि इच्छा पूरी होने पर भक्त यहां पर दोबारा आकर कलावा खोलते हैं। वैसे यह यह स्थानीय परंपरा है।

कैसे पहुंचें रायसेन के सोमेश्वर महादेव मंदिर?

- यह मंदिर मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित है। इसलिए आपको रायसेन पहुंचना होगा।

 - एमपी की राजधानी भोपाल से रायसेन करीब 45 किलोमीटर दूर है।

 - रेलवे स्टेशन भोपाल जंक्शन से आप रायसेन के लिए टैक्सी ले सकती हैं।

 - जब आप रायसेन पहुंचेगी तो आपको किले के निचले हिस्से (तलहटी) तक जाना होगा। उधर से मंदिर तक जाने के लिए पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। 

- वैसे मंदिर साल में एक बार महाशिवरात्रि पर खोला जाता है, बाकी समय आप किले के बाहर दर्शन कर सकते हैं। सावन के दौरान आप रायसेन का किला देख सकती हैं। 

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