Pawan Khera की मुश्किलें बढ़ीं! Guwahati High Court ने अग्रिम ज़मानत याचिका की खारिज, असम CM की पत्नी ने दर्ज कराया है केस

Pawan Khera
ANI
रेनू तिवारी । Apr 24 2026 11:10AM

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को शुक्रवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट से एक और झटका लगा। कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को शुक्रवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट से एक और झटका लगा। कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी। यह आदेश जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया ने दिया, जिन्होंने इस मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

यह घटनाक्रम कांग्रेस नेता की ट्रांज़िट ज़मानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा से कहा था कि वे इस मामले में राहत के लिए असम की अदालत का रुख करें। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि न तो वह और न ही तेलंगाना हाई कोर्ट असम की अदालत के काम में कोई दखल देगा, जो इस मामले की सुनवाई करेगी।

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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कांग्रेस पर हमला करने का एक और मौका दे दिया। BJP ने कहा कि इस फैसले से सरमा और उनकी पत्नी के खिलाफ खेड़ा के "बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित" अभियान की पोल खुल गई है। BJP प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने X (ट्विटर) पर एक वीडियो में कहा था, "वे दस्तावेज़ (जिनका इस्तेमाल खेड़ा ने किया था) जाली, नकली, फोटोशॉप्ड और AI-जनरेटेड निकले; और महज़ आधे घंटे के अंदर ही पूरी सच्चाई सामने आ गई।"

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सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी पवन खेड़ा की ट्रांज़िट ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि खेड़ा को राहत के लिए संबंधित राज्य (असम) की निचली अदालत या हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया था कि वह या तेलंगाना हाई कोर्ट, असम की अदालत की न्यायिक कार्यवाही में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के खिलाफ कुछ दस्तावेज़ पेश किए थे।

आरोप: खेड़ा ने भ्रष्टाचार और व्यापारिक अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।

शिकायत: रिनिकी भुइयां सरमा ने इन आरोपों को झूठा और मानहानिकारक बताते हुए मामला दर्ज कराया।

दावा: शिकायतकर्ता का कहना है कि खेड़ा द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेज़ फर्जी थे।

बीजेपी का तीखा प्रहार: "AI-जनरेटेड थे दस्तावेज़"

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि खेड़ा का अभियान पूरी तरह से "बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित" था।

पूनावाला ने दावा किया कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज़ जाली, फोटोशॉप्ड और AI-जनरेटेड थे। बीजेपी का कहना है कि यह फैसला कांग्रेस की 'झूठ की राजनीति' का पर्दाफाश करता है। 

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