ममता को जिताने के लिए घरों से निकले मुस्लिम, लेकिन पलट गया खेल!

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अभिनय आकाश । Apr 24 2026 10:33AM

कई लोगों को लगा कि ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले ही हार मान ली है। लेकिन यहां पर ममता बनर्जी ने जबरदस्त पॉलिटिक्स खेली थी। उन्होंने अपने मुस्लिम वोट बैंक को एक्टिवेट किया था। ममता बनर्जी ने अपने वोट बैंक को इशारा कर दिया था कि मुझे जिताने के लिए जान लगा दो। नहीं तो बीजेपी जो करेगी उसे झेलना।

श्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में बंपर वोटिंग हुई लेकिन हिंसा भी खूब हुई। दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से बीजेपी कैंडिडेट सुभेंदु सरकार को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया। तो वहीं आसनसोल साउथ सीट से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर भी हमला हो गया। वोटिंग के दौरान ऐसी घटना देश के किसी और राज्य में हुई होती तो लोकतंत्र अभी तक खतरे में पड़ चुका होता। पश्चिम बंगाल की हिंसा पर सब खामोश हैं। इसी बीच ममता बनर्जी को जिताने के लिए मुस्लिम भारी संख्या में घरों से निकल आए। आपको ममता बनर्जी का कुछ दिन पहले दिया गया वह बयान याद होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर तृणमूल रही तो फिर मिलेंगे। और रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे। 

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कई लोगों को लगा कि ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले ही हार मान ली है। लेकिन यहां पर ममता बनर्जी ने जबरदस्त पॉलिटिक्स खेली थी। उन्होंने अपने मुस्लिम वोट बैंक को एक्टिवेट किया था। ममता बनर्जी ने अपने वोट बैंक को इशारा कर दिया था कि मुझे जिताने के लिए जान लगा दो। नहीं तो बीजेपी जो करेगी उसे झेलना। इस बयान का असर यह हुआ कि लाखों की संख्या में मुस्लिम घरों से निकलकर ममता बनर्जी को वोट डालने पहुंच रहे हैं। मुस्लिम वोटर्स तो भारी संख्या में वोट डालने आ ही रहे हैं, लेकिन इस बार हिंदू वोटर्स भी बड़ी संख्या में बीजेपी की तरफ जाते दिख रहे हैं। इस बार बंगाल में हिंदू वोटर्स गेम चेंजर बन सकते हैं। यह कैसे होगा वह आपको आगे बताएंगे। लेकिन उससे पहले देखिए कि मुस्लिम वोटर्स ममता बनर्जी को जिताने के लिए क्या कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के लिए एक सबसे बड़ा फैक्टर हमेशा से ही मुस्लिम वोट बैंक रहा है। 

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बीजेपी और ममता बनर्जी के बीच यही मुस्लिम वोट बैंक एक दीवार बनकर खड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की संख्या लगभग 27% है। लेकिन पश्चिम बंगाल में 27% मुस्लिम वोट ही तय करता है कि सरकार किसकी बनेगी। 70% हिंदू यह नहीं तय कर पाता। आप देखिए कि 2021 में कुल 44 मुस्लिम विधायक बने थे जिनमें से 43 टीएमसी के थे। यानी बंगाल का मुस्लिम अब कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों में नहीं बट रहा वो पूरी तरह से ममता बनर्जी को जिताने के लिए जुट गया है। इस बार भी मुस्लिम वोटर्स ममता बनर्जी को जिताने के लिए अपने घरों से निकल आए हैं। लेकिन 2026 का चुनाव थोड़ा अलग भी है। सबसे पहले तो यह एसआईआर के बाद पहला चुनाव है। एसआईआर की वजह से 91 लाख वोट कट गए थे। जिनमें डुप्लीकेट डिस्प्यूटेड और डेड वोटर्स शामिल थे। लेकिन एसआईआर से नाम ना कट जाए इसीलिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में बसे बंगाल के वोटर्स बड़ी संख्या में वोट डालने बंगाल पहुंचे।

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