Kerala के नए Governor Om Prakash Mathur के आदेश पर विवाद, Lok Bhavan में मांसाहारी भोजन पर रोक

Om Prakash Mathur
ANI
अंकित सिंह । Oct 24 2026 12:44PM

केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पदभार संभालते ही लोक भवन में मांसाहारी भोजन पर कथित प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वामपंथी दलों ने इसे लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह कदम संघ परिवार के भगवा एजेंडे को केरल पर थोपने का प्रयास है।

केरल के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को अपने कार्यकाल के पहले ही दिन कांग्रेस और CPI(M) की आलोचना का सामना करना पड़ा। यह आलोचना उन खबरों के बाद हुई, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने राजभवन की रसोई को केवल शाकाहारी भोजन परोसने का निर्देश दिया है। मीडिया के एक हिस्से ने खबर दी कि माथुर ने निर्देश दिया था कि लोक भवन की रसोई में मांसाहारी व्यंजन न तो बनाए जाएं और न ही परोसे जाएं।

इसे भी पढ़ें: Kerala: सिनेमाघरों के CCTV फुटेज लीक मामले में वरिष्ठ अधिकारी करेंगे जांच की निगरानी, आयोग का आदेश

शुक्रवार को यहाँ लोक भवन में आयोजित एक समारोह में माथुर ने केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर का स्थान लिया है, जिन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। AICC के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस कदम को लेकर माथुर पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह आदेश संघ परिवार के असंवैधानिक हितों से प्रेरित है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्यपाल के आधिकारिक आवास पर इस तरह की पाबंदी लगाना अपनी सीमा से बाहर जाने जैसा है। उन्होंने केरल की खान-पान की विविध परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की तटीय भौगोलिक स्थिति के कारण यहाँ मछली पकड़ने का उद्योग काफी फला-फूला है। उन्होंने कहा कि यहाँ के लोगों को अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि केरल के लोगों की खान-पान की आदतों को सीमित करने या उन्हें यह बताने की कोई भी कोशिश कि अब से उन्हें क्या खाना चाहिए, स्वीकार नहीं की जा सकती। अलाप्पुझा लोकसभा सांसद ने आरोप लगाया कि ऐसी पाबंदियां, जो लोगों की खान-पान की पसंद में "दखल" देती हैं और केरलवासियों की पारंपरिक जीवनशैली को खत्म करने की कोशिश करती हैं, वे संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।

इसे भी पढ़ें: Alappuzha में पारिवारिक विवाद के बाद दामाद ने सास की चाकू मारकर की हत्या, आरोपी फरार

उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठा एक व्यक्ति, जिसका यह कर्तव्य है कि वह लोगों के 'क्या खाना है' और 'कैसे जीना है' तय करने के अधिकार की रक्षा करे, वही व्यक्ति दूसरों पर अपनी खान-पान की आदतें थोपने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह संघ परिवार के असंवैधानिक मंसूबों का ही एक हिस्सा है। यह केरल में संघ परिवार के 'भगवा एजेंडे' को लागू करने की दिशा में पहला कदम है। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़