Strait of Hormuz के पास भारतीय पोत पर हमला, Gujarat के नाविक की मौत

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ओमान तट के पास भारतीय मालवाहक पोत पर हुए संदिग्ध ड्रोन हमले में गुजरात के देवभूमि द्वारका के नाविक नाहिम अजीज गंधार की जान चली गई। औपचारिकताएं पूरी करने में हो रही देरी के कारण परिवार ने उनका अंतिम संस्कार ओमान के खसाब बंदरगाह पर करने का निर्णय लिया है। जहाज पर सवार 13 अन्य सदस्यों को सुरक्षित स्वदेश लाने के प्रयास जारी हैं।

खंभालिया (गुजरात), चार नवंबर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान तट पर भारतीय ध्वज वाले एक मालवाहक पोत पर संदिग्ध ड्रोन हमले में मारा गया 25 वर्षीय नाविक गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले का रहने वाला था। पोत मालिक के एक रिश्तेदार ने बुधवार को यह जानकारी दी। नाहिम अजीज गंधार उस जहाज पर 14 सदस्यीय चालक दल का हिस्सा था, जो गुजरात के जामनगर जिले के बेदी बंदरगाह पर पंजीकृत है।

पोत के मालिक के रिश्तेदार ने बताया कि चालक दल के सभी सदस्य सलाया के रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि औपचारिकताओं को पूरा करने में हो रही देरी को देखते हुए, नाविक के परिवार ने गंधार को ओमान में ही दफनाने का फैसला किया है। पोत के मालिक जुसाब के बड़े भाई अहमद सुंभनिया ने कहा कि इस हमले में मशीनीकृत नौकायन पोत (एमएसवी) और उस पर लदे खजूर के माल का भंडार नष्ट हो गया।

भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा की। सुंभनिया ने बताया कि अल जुसुफी नामक पोत संयुक्त अरब अमीरात के हमरिया बंदरगाह से लगभग 900 मीट्रिक टन खजूर लेकर पोरबंदर आ रहा था, तभी दो नवंबर को ओमान के तट के पास लिमाह के निकट उस पर हमला हुआ। उन्होंने सलाया से फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जब हमला हुआ, तब गंधार केबिन के अंदर ‘स्टीयरिंग व्हील’ पर था।

उसके पैर में बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया और उसके बाएं हाथ में भी गंभीर चोट आई।’’ सुंभनिया ने बताया कि दो नवंबर को शाम करीब पौने पांच बजे उन्हें एमएसवी के कप्तान का फोन आया और उन्होंने बताया कि जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ है और उसमें आग लग गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमले के पांच मिनट के भीतर ही चालक दल के सदस्य लाइफबोट पर सवार हो गए।’’ सुंभनिया के अनुसार, यह जहाज ओमान के तट के करीब—किनारे से लगभग दो किलोमीटर दूर और लिमाह बंदरगाह को पार करने के कुछ नॉटिकल मील बाद पहुंच गया था, तभी यह संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ। उन्होंने बताया कि औपचारिकताओं को पूरा करने में हो रही देरी को देखते हुए, गंधार के परिवार ने उनके शव को भारत वापस लाने के बजाय ओमान के खसाब बंदरगाह पर ही दफनाने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि चालक दल के अन्य सदस्यों ने पहले ही वीजा के लिए आवेदन कर दिया है और वे मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे उड़ान से भारत लौट आएंगे। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तीन नवंबर को ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि उनका मंत्रालय और ओमान में भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि 13 बचे लोगों को तुरंत मदद मिल सके और उनकी जल्द से जल्द स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जा सके।

इस हमले की निंदा करते हुए, भारत ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के राजनयिक समाधान के लिए जारी बातचीत को पूरा करने पर भी जोर दिया है ताकि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता वापस आ सके। इस बातचीत में अमेरिका, इज़राइल और ईरान शामिल हैं। इस बीच, इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन ने नयी दिल्ली में ईरान के राजदूत को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य से भारतीय पारंपरिक नौकाओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें।

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