Kerala आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, पूर्व आयुक्त Sreeram Sambasiva Rao ने सौंपी रिपोर्ट

तिरुवनंतपुरम में आबकारी विभाग से हटाए जाने से ठीक पहले पूर्व आयुक्त सीराम संबाशिव राव ने सरकार को पत्र लिखकर दो अधिकारियों पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में बार मालिकों से हर महीने और लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर अवैध वसूली की बात कही गई है। इसके अलावा आबकारी मंत्री एम. लिजू और बार मालिक के संपर्कों का जिक्र होने पर माकपा ने भी सवाल उठाए हैं।
तिरुवनंतपुरम, सात नवंबर पूर्व आबकारी आयुक्त सीराम संबाशिव राव ने कार्यमुक्त किए जाने से कुछ समय पहले राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें आबकारी विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राव आबकारी आयुक्त और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।
उनका तबादला करके उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में विशेष सचिव नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में राव ने यह भी उल्लेख किया कि आबकारी मंत्री एम. लिजू कथित लेनदेन में शामिल बार के एक मालिक के परिचित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त आबकारी आयुक्त (जेईसी) के पद पर कार्यरत रहे एस. विनोद के कथित तौर पर मुवाट्टुपुझा स्थित गंगा बार के मालिक से करीबी संबंध होने और बार लाइसेंस से जुड़े मामलों में प्रतिष्ठान के लिए मध्यस्थ के रूप में काम करने का आरोप लगाया गया है।
इसमें दावा किया गया है कि एक मुखबिर ने आरोप लगाया कि विनोद ने बार मालिक से हर महीने 30,000 रुपये की मांग की और बार की अवधि तथा लाइसेंस के नवीनीकरण से संबंधित मंजूरी दिलाने के लिए 50,000 रुपये भी लिए। रिपोर्ट में अलप्पुझा के उप आबकारी आयुक्त अजय के खिलाफ लगे आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि राव को मिली जानकारी के अनुसार, कायमकुलम के कट्टाचिरा स्थित रोमा सेंटर बार के मालिक को उपायुक्त के निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर 30,000 रुपये देने को कहा गया।
रिपोर्ट में बार मालिक की पहचान रथीश के रूप में की गई है और कहा गया है कि वह आबकारी मंत्री का परिचित है। इसमें इस साल ओणम के बाद अप्रैल में बार लाइसेंस के नवीनीकरण से संबंधित मंजूरी के लिए कथित तौर पर 20,000 रुपये दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। राव ने सिफारिश की कि विनोद और अजय को तत्काल वर्तमान तैनाती से हटाकर आबकारी अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो या ताड़ी बोर्ड जैसे कार्यालयों में स्थानांतरित किया जाए।
इस बीच, माकपा के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन ने आरोप लगाया कि पूर्व आयुक्त की रिपोर्ट में किए गए खुलासे विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार में आबकारी मंत्री की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन खुलासों से भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों और कथित तौर पर भुगतान में शामिल बार मालिकों, दोनों के साथ मंत्री के संबंधों पर सवाल खड़े होते हैं। गोविंदन ने कहा, ‘‘मंत्री को इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।’’
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