व्यवसायी से 3.93 करोड़ की ठगी में Delhi Police ने सात लोगों को दबोचा

व्यवसायी से 3.93 करोड़ की ठगी में Delhi Police ने सात लोगों को दबोचा
प्रतिरूप फोटो
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दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई ने एक कारोबारी के बैंक खाते से अनधिकृत तौर पर 3.93 करोड़ रुपये निकालने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को हवाला और विदेशी ऐप के जरिए यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से दर्जनों चेकबुक, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

दिल्ली के एक व्यवसायी के बैंक खाते से 149 बार में 3.93 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी में कथित रूप से सहायता करने के आरोप में सात व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही ‘म्यूल’ (कमीशन पर मिलने वाले) खातों, नकद निकासी करने वालों और विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप तथा हवाला से जुड़े संदिग्ध गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने जांच के दौरान 45 चेक बुक, 25 बैंक पासबुक, 45 एटीएम कार्ड और 13 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव त्यागी ने बताया कि जांच से मुख्य आरोपी राजस्थान के फलोदी निवासी ब्रिज लाल (29) और एक मनी-एक्सचेंज ऐप के बीच कथित संबंधों का खुलासा हुआ। उन्होंने कहा कि इस ऐप का उपयोग ठगी की रकम को अमेरिकी डॉलर से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी ‘यूएसडीटी’ में बदलने के लिए हवाला के जरिए किया गया था।

पुलिस के अनुसार, यह मामला पांच अक्टूबर को दर्ज किया गया था, जब गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) और ऋण से जुड़े लेनदेन का काम करने वाले प्रिंस बंसल (28) ने अपने बैंक खाते में अनधिकृत पहुंच की सूचना दी थी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पांच अक्टूबर पूर्वाह्न करीब 11 बजे उनकी जानकारी या सहमति के बिना 149 लेनदेन हुए, जिसके बाद खाते से 3.93 करोड़ रुपये काटे गए। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल ने 1.78 करोड़ रुपये की राशि के लेनदेन पर रोक लगवा दी।

अधिकारी ने बताया कि इस बाबत ई-प्राथमिकी दर्ज की गई और पैसों के लेन-देन का पता लगाने के लिए गठित एक टीम ने संदिग्ध खाताधारकों और मददगारों की पहचान की। डीसीपी ने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम सात दिनों के लिए राजस्थान गई थी। उन्होंने बताया कि ब्रिज लाल की गिरफ्तारी से टीम को आईएफएसओ थाने में 95 लाख रुपये की धोखाधड़ी के अन्य मामले को हल करने में मदद मिली।

त्यागी ने बताया कि पूछताछ के दौरान लाल ने खुलासा किया कि उसके पास एक ऐप में ‘वॉलेट’ है और वह एक विदेशी मोबाइल नंबर के जरिए एक विदेशी साइबर गिरोह से जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, उसने कथित तौर पर ‘म्यूल खातों’ के माध्यम से धन प्राप्त किया, नकदी निकाली और हवाला के माध्यम से यूएसडीटी खरीदा। हवाला से जुड़े एक व्यक्ति के निर्देश पर उसने पंजाब के खन्ना में एक व्यक्ति को नकदी सौंप दी।

अधिकारी ने कहा कि इन दावों की जांच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान राजस्थान के रहने वाले पीयूष तलानिया (19), विपिन चंवरिया (19), सुनील (23), विक्रम (23), राकेश बाहादू (26) और हेमंत सिंह (23) के तौर पर हुई है।

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