BJP सांसद Nishikant Dubey पर टिप्पणी मामला: Delhi High Court ने पूर्व वित्त सचिव को दिया निर्देश

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग को एक पॉडकास्ट में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को म्यूट करने या हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने दुबे द्वारा दायर दो करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में गर्ग और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को समन जारी किया। सुनवाई के दौरान मोइत्रा के वकील ने भी एक्स पर मौजूद संबंधित पोस्ट हटाने का भरोसा दिया।

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग से कहा कि वह एक पॉडकास्ट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ की गई अपनी कुछ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटा दें या ‘म्यूट’ (आवाज विहीन) कर दें। न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने गर्ग से कहा कि वह एक यूट्यूबर के पॉडकास्ट में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को ‘म्यूट’ करने या हटाने के लिए कदम उठाएं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के वकील ने भी भरोसा दिलाया कि उनकी मुवक्किल (मोइत्रा) ‘एक्स’ पर मौजूद कथित मानहानिकारक पोस्ट हटा देंगी।

हालांकि, वकील ने कहा कि सांसद के पास अपने पोस्ट में उठाए गए व्यापक मुद्दे पर बोलने का अधिकार बना रहेगा। न्यायमूर्ति गेडेला ने दुबे द्वारा दायर किये गये मानहानि के मुकदमे में गर्ग और मोइत्रा को समन जारी किया। दुबे ने अपने खिलाफ आरोप लगाने से गर्ग एवं मोइत्रा को रोकने, माफी मांगने और दो करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने का अदालत से अनुरोध किया है।

उच्च न्यायालय ने गर्ग और मोइत्रा से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। प्रतिवादियों के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और कहा कि मुकदमा ‘सही तस्वीर पेश नहीं करता है।’ उसके बाद उच्च न्यायालय ने पूछा कि क्या वे इस बीच उस सामग्री को और आगे प्रसारित करने से खुद को रोक सकते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह जानता है कि वादी और पूर्व वित्त सचिव, दोनों ही प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं तथा पूर्व वित्त सचिव को पॉडकास्ट में ‘अनुचित शब्द’ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था।

न्यायमूर्ति गेडेला ने मौखिक तौर पर कहा, ‘‘आप इस तरह के शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। मान लीजिए कोई आपसे ऐसा कहे... तो क्या आप इसे हल्के में लेंगे?...आप इस शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह बिल्कुल अपमानजनक है।

आप किसी को भी उस नाम से नहीं बुला सकते। बाकी बातें बहस का विषय हो सकती हैं।’’ गर्ग के वकील ने आश्वासन दिया कि अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर वह पॉडकास्ट मेजबान से संपर्क करेंगे, ताकि पॉडकास्ट में मौजूद कथित तौर पर मानहानि करने वाले कुछ वाक्यांशों को ‘म्यूट’ (हटाया/बंद) किया जा सके। गर्ग के वकील ने दलील दी कि पहले भाजपा नेता ने उनके मुवक्किल के खिलाफ ‘व्यक्तिगत टिप्पणी’ की थी जिसके जवाब में उन्होंने कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि किसी भी ‘गंभीर परिस्थिति’ के न होने पर, पॉडकास्ट के रिलीज होने के एक महीने से ज़्यादा समय बाद अंतरिम रोक लगाने का कोई मामला नहीं बनता है। भाजपा नेता का आरोप है कि 17 सितंबर को एक पॉडकास्ट/इंटरव्यू के दौरान गर्ग ने उनके खिलाफ झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए, जिन्हें यूट्यूब, फेसबुक एवं अन्य डिजिटल मंचों पर प्रकाशित और प्रसारित किया गया। उच्च न्यायालय का रुख करने से पहले दुबे ने 21 सितंबर को गर्ग को एक कानूनी नोटिस भेजा था, जिसमें उन्होंने उनसे कथित मानहानिकारक आरोपों को तुरंत वापस लेने, उनका खंडन करने और उन्हें हटाने की मांग की थी।

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