Defence Export SOP को सरकार ने बनाया सरल, गैर-घातक रक्षा सामग्री का निर्यात होगा आसान

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया में सुधार करते हुए अधिकांश देशों के लिए गैर-घातक सैन्य सामग्री भेजने पर हितधारकों के परामर्श की अनिवार्यता समाप्त कर दी। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और निविदाओं के लिए भी मंजूरी की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। संवेदनशील देशों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आवश्यक सुरक्षा उपाय पहले की तरह लागू रहेंगे।
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को सरल बनाने के लिए व्यापक सुधार किये हैं, जिसके तहत संवेदनशील देशों के लिए ‘‘उचित सुरक्षा उपाय’’ बनाए रखते हुए अधिकांश गंतव्यों के लिए गैर-घातक रक्षा सामग्री के निर्यात के लिए हितधारकों के परामर्श को ‘समाप्त’ कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और प्रदर्शनियों के लिए सभी सामग्रियों के निर्यात के लिए भी हितधारकों के परामर्श को समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय कंपनियां अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और अंतरराष्ट्रीय अवसरों का अधिक तेजी से लाभ उठाने में सक्षम होंगी। बयान के अनुसार, मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को एक विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद वैश्विक रक्षा विनिर्माण तथा निर्यात भागीदार बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप, रक्षा निर्यात एसओपी और खुली सामान्य निर्यात लाइसेंस प्रणाली को सरल बनाने के लिए सुधारों का एक व्यापक ‘सेट’ शुरू किया है, जिससे ‘मेक-इन-इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
रक्षा निर्यात एसओपी को आसान बनाने के बारे में कहा गया, है, ‘‘ज़्यादातर जगहों पर गैर-घातक रक्षा सामग्रियों के निर्यात के लिए हितधारकों से सलाह-मशविरा करने की ज़रूरत को खत्म कर दिया गया है, जबकि संवेदनशील देशों के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।’’ मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को कम करना, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेजी से पहुंच बनाना और भारतीय रक्षा कंपनियों को वैश्विक व्यापारिक अवसरों का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में सक्षम बनाना है, जबकि यह भी सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। रक्षा निर्यात एसओपी के सरलीकरण पर इसने कहा, ‘‘अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामग्री के निर्यात के लिए हितधारकों के परामर्श को समाप्त कर दिया गया है, जबकि संवेदनशील देशों के लिए उचित सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।’’ बयान के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को छूने के साथ, ये सुधार भारत के रक्षा विनिर्माण और निर्यात तंत्र की गति को और मजबूत करते हैं।
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