Kerala में मंत्रियों की अनदेखी कर फैसले ले रहे मुख्यमंत्री और प्रायोजक: CPI(M)

तिरुवनंतपुरम में माकपा नेता पी राजीव ने आरोप लगाया कि राज्य में संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को बताए बिना बार लाइसेंस समेत कई अहम प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं। पार्टी के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने भी आबकारी विभाग की इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं मंत्री एम लिजू ने लाइसेंस जारी करने में जल्दबाजी की जांच कराने की बात कही है।
तिरुवनंतपुरम, तीन नवंबर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पी राजीव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केरलम में मंत्रियों तथा अधिकारियों की जानकारी के बिना ही मुख्यमंत्री वी डी सतीशन और प्रायोजक सरकार के अहम फैसले कर रहे हैं। राज्य के कुछ होटलों को हाल ही में आबकारी मंत्री एम लिजू या उनके विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना कथित तौर पर बार लाइसेंस दिए जाने का जिक्र करते हुए राजीव ने पूछा, ‘‘केरलम में शासन कौन चला रहा है?’’ अपने ही सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री और प्रायोजक ही राज्य चला रहे हैं और संबंधित मंत्रियों की जानकारी के बिना प्रशासनिक मामलों पर फैसले कर रहे हैं। माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने भी बार लाइसेंस दिए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि मंत्री की जानकारी के बिना मंजूरी जारी की जा रही थी।
गोविंदन ने कहा कि पिछली वाम लोकतान्त्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के दौरान तीन सितारा से अधिक रेटिंग वाले होटलों को बार लाइसेंस प्रतिष्ठानों का पूरी तरह आकलन करने के बाद ही जारी किए जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अब मंत्री की जानकारी के बिना लाइसेंस दिए जा रहे हैं। यह हैरानी की बात है।’’ मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास क्लिफ हाउस में एक करोड़ रुपये से अधिक की मरम्मत संबंधी कार्यों को मंजूरी देने वाले आदेश को रद्द किए जाने के निर्देश का जिक्र करते हुए गोविंदन ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले मंजूरी दी और मामला जांच के दायरे में आने के बाद आदेश वापस ले लिया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पहले वे इसकी अनुमति देते हैं और फिर कोई समस्या आने पर इसे वापस ले लेते हैं। यह उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है।’’ उन्होंने कहा कि माकपा बार लाइसेंस दिए जाने के मामले में किसी भी तरह की जांच से नहीं डरती है। लिजू ने सोमवार को कहा था कि सरकार इस बात की जांच करेगी कि बार को शराब के लाइसेंस जारी करने में अधिकारियों ने कोई ‘‘अनुचित जल्दबाजी’’ तो नहीं दिखाई।
उन्होंने दावा किया था कि पिछली एलडीएफ सरकार द्वारा बनाए गए मौजूदा नियमों के तहत, कई वर्षों से बंद बार को भी 24 घंटे के भीतर लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं। पिछली सरकार द्वारा बनाए गए नियमों में कुछ खामियां होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इस बात की जांच की जाएगी कि जल्दबाजी में फैसले क्यों लिए गए और लाइसेंस दिए जाने के बारे में आबकारी आयुक्त तक को जानकारी क्यों नहीं दी गई। हर पहलू की जांच की जाएगी और सभी खामियों को दूर किया जाएगा।’’
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