2.3 अरब डॉलर Loss के बाद Air India बढ़ाएगी बड़े विमानों का Fleet, नेटवर्क सुधारने पर जोर

एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने के लिए अपने बड़े विमानों का बेड़ा बढ़ाने की तैयारी में है। वित्त वर्ष 2025-26 में 2.3 अरब डॉलर के घाटे के बावजूद कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तेवोल्डे गेब्रेमरियम ने जल्द मुनाफे में लौटने का भरोसा जताया है। एयरलाइन अब खर्च घटाने और नेटवर्क सुधारने पर काम कर रही है।
टाटा समूह के अधीन आने के बाद एयर इंडिया अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने और कारोबार को फिर से मजबूत बनाने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी अपने बड़े विमानों के बेड़े में और बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। एयर इंडिया के सीईओ तेवोल्डे गेब्रेमरियम ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने माना कि अंतरराष्ट्रीय विमानन बाजार में एयर इंडिया अपनी क्षमता के मुकाबले अभी काफी पीछे है, लेकिन आने वाले समय में स्थिति बदलने की उम्मीद है। उनका कहना है कि एयरलाइन बहुत जल्द मुनाफे में लौट सकती है।
तेवोल्डे गेब्रेमरियम ने कहा कि एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रही है। कंपनी इस स्थिति को बदलने के लिए विमानों की संख्या बढ़ाने, उड़ानों के नेटवर्क को बेहतर बनाने और अपने प्रमुख केंद्रों की व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि विमान कंपनी को मुनाफे में आते देखने की उनकी बेचैनी शेयरधारकों से भी ज्यादा है। उन्हें भरोसा है कि सही फैसलों और लगातार प्रयासों से एयर इंडिया की आर्थिक स्थिति में जल्द सुधार होगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कंपनी के सामने अभी कई बड़ी चुनौतियां हैं। इनमें लगातार हो रहा घाटा, हवाई मार्गों में रुकावट और संचालन पर बढ़ता खर्च शामिल है। गेब्रेमरियम के मुताबिक, प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर पर आने वाली लागत कंपनी के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। ऐसे में एयर इंडिया अपने खर्चों को कम करने के साथ उड़ानों के संचालन को ज्यादा बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है। भारत की विमानन क्षमता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश सही समय पर सही फैसले ले तो वह दुनिया के बड़े विमानन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
गौरतलब है कि एयर इंडिया ने अपने खर्चों पर लगाम लगाने के लिए पिछले महीने एक विशेष टीम भी बनाई थी। इस टीम में अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसे पूरी तरह खर्च कम करने के उपाय तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी का उद्देश्य हर विभाग में होने वाले खर्च की समीक्षा करना और उन जगहों की पहचान करना है, जहां बिना कामकाज प्रभावित किए बचत की जा सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2.3 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। जनवरी 2022 में टाटा समूह द्वारा एयरलाइन का अधिग्रहण किए जाने के बाद यह उसका अब तक का सबसे बड़ा सालाना घाटा है। अधिग्रहण के बाद से कंपनी का कुल घाटा करीब 5.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक संदेश में गेब्रेमरियम ने खर्च के मामले में सावधानी, जवाबदेही और सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों पर कंपनी का पूरा नियंत्रण नहीं हो सकता, लेकिन रोजमर्रा के कामकाज में लिए जाने वाले फैसलों से खर्च को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। बता दें कि एयर इंडिया पिछले कुछ वर्षों से अपने पुराने विमानों को बदलने, नए विमानों को बेड़े में शामिल करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य बेहतर सेवा और कम लागत के जरिए बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है। अब देखना होगा कि विस्तार की इस योजना के साथ बढ़ते घाटे को कम करने में एयरलाइन कितनी सफल होती है।
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