Bangladeshi घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए CM Himanta अपना रहे नई रणनीति, अब हिरासत में लेने की बजाय सीधे बॉर्डर पर वापस धकेल दिया जाता है

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि असम सरकार अब अवैध प्रवासियों के मामले में नई रणनीति अपना रही है। पहले जहां ऐसे लोगों को हिरासत में लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझा दिया जाता था, वहीं अब उन्हें सीधे सीमा से वापस भेजने की नीति पर जोर दिया जा रहा है।
असम में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर एक बार फिर सख्त रुख सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई का जिक्र करते हुए बताया कि बीस अवैध प्रवासियों को वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। इस वर्ष यह दूसरी सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, इससे पहले पिछले महीने 21 लोगों को सीमा पार भेजा गया था। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में साफ किया कि राज्य में अवैध घुसपैठ के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इसे और तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि असम सरकार अब अवैध प्रवासियों के मामले में नई रणनीति अपना रही है। पहले जहां ऐसे लोगों को हिरासत में लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझा दिया जाता था, वहीं अब उन्हें सीधे सीमा से वापस भेजने की नीति पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ तत्काल प्रभावी कदम उठाया जा सकेगा।
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उन्होंने अपने वक्तव्य में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जो लोग केवल सख्ती की भाषा समझते हैं, उन्हें समझाने से कोई फायदा नहीं होता। इसी सोच के आधार पर राज्य सरकार लगातार ऐसे लोगों को बाहर करने का काम कर रही है जो खुद से राज्य छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन बीस लोगों को कब और कहां पकड़ा गया या उन्हें किस तरीके से सीमा पार भेजा गया, लेकिन उन्होंने दोहराया कि यह नीति आगे भी जारी रहेगी।
हम आपको याद दिला दें कि इस वर्ष की शुरुआत में भी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने संकेत दिए थे कि असम सरकार अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज करेगी और इसके लिए भारत और बांग्लादेश के बीच किसी औपचारिक समझौते का इंतजार नहीं करेगी। इस नीति का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती घुसपैठ की घटनाओं पर तुरंत रोक लगाना है।
हम आपको बता दें कि राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान हिमंत बिस्व सरमा ने कई बार यह आरोप लगाया कि बांग्लादेश से आने वाले अवैध प्रवासी राज्य की जनसंख्या संरचना को बदल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल को ऐसे लोगों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां से वे आगे असम और अन्य राज्यों में पहुंच जाते हैं। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने खासतौर पर हिंदू मतदाताओं से समर्थन की अपील भी की।
असम में भी चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी को चुनाव जीतने के लिए मिया समुदाय के वोटों की जरूरत नहीं है। इस बयान की काफी आलोचना हुई, लेकिन मुख्यमंत्री अपने रुख पर कायम रहे और उन्होंने अवैध घुसपैठ को राज्य की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा बताया।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद सीमा पर घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आई है। हालांकि भारतीय सुरक्षा बलों ने कई प्रयासों को नाकाम किया है, लेकिन यह खतरा अभी भी बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक असम के पश्चिमी और दक्षिणी जिले इस मामले में सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं, जहां से घुसपैठ की कोशिशें लगातार सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई ही इस समस्या का समाधान हो सकती है। राज्य सरकार की नई नीति इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है, जिसमें कानूनी प्रक्रिया की बजाय त्वरित निष्कासन पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, असम में अवैध घुसपैठ का मुद्दा केवल सुरक्षा का ही नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का भी केंद्र बन गया है। राज्य सरकार जहां इसे सख्ती से नियंत्रित करने के लिए नई रणनीतियां अपना रही है, वहीं विपक्ष और अन्य समूह इस पर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होती है और इससे राज्य में सुरक्षा तथा सामाजिक संतुलन पर क्या असर पड़ता है।
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