INDIA गठबंधन की 1 नवंबर की रैली को समर्थन देगी CJP, Abhijeet Dipke ने कर दिया बड़ा ऐलान

Abhijeet Dipke
ANI
अंकित सिंह । Oct 28 2026 7:12PM

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की रैली को समर्थन देने की घोषणा की है। कांग्रेस इसका आयोजन वोट बचाओ, देश बचाओ अभियान के तहत कर रही है। वहीं सीटीआई ने राहुल गांधी से समय मांगकर दिवाली सीजन में व्यापार प्रभावित होने की चिंता जताई है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी रामलीला मैदान से होने वाली 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की 1 नवंबर की रैली को अपना समर्थन देगी। कांग्रेस द्वारा अपने "वोट बचाओ, देश बचाओ" अभियान के तहत आयोजित इस रैली में देशभर से नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के सहयोगी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 20 मिनट की मुलाकात का समय मांगा है, ताकि व्यापारियों को कारोबार में आ रही बाधाओं को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखी जा सकें।

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गांधी को लिखे एक पत्र में, CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा है कि 20 बाजारों के प्रतिनिधि उन्हें यह बताना चाहते हैं कि प्रस्तावित रैली - जिसमें 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना है - किस तरह दिवाली के आसपास के त्योहारी सीजन में कारोबार को बाधित कर सकती है। अभिजीत दिपके ने बुधवार को सरकार के सेंसरशिप कदमों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर नागरिकों की आवाज़ दबाने से ज़मीनी हकीकत नहीं बदलेगी, बल्कि इससे जनता का सरकार पर अविश्वास और गहरा होगा। 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में दिपके ने चेतावनी दी, 'इंस्टाग्राम पर की जा रही यह कार्रवाई काम नहीं आएगी! सरकार हर दिन हज़ारों पोस्ट और अकाउंट हटा रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि वह एक बुनियादी बात भूल रही है। इंस्टाग्राम तो बस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ लोग अपने सवाल उठा रहे हैं। इन सवालों के पीछे की वजहें सोशल मीडिया से कहीं बाहर मौजूद हैं, और अकाउंट हटा देने से वे समस्याएं खत्म नहीं हो जाएंगी। असल में, इस सेंसरशिप से उन लोगों के बीच और ज़्यादा अविश्वास पैदा होने का खतरा है, जिनके प्रति सरकार जवाबदेह है।'

ये टिप्पणियाँ सोशल मीडिया नेटवर्क पर कंटेंट मॉडरेशन नीतियों, डिजिटल कंटेंट हटाने के निर्देशों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चल रही व्यापक जांच-पड़ताल के बीच आई हैं। हाल ही में, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक संगठनों को 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम' (IT Act) की धारा 69(A) जैसे निर्देशों के तहत बार-बार सस्पेंशन (अकाउंट बंद किए जाने) का सामना करना पड़ा है। मेटा (Meta) और X (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स से कहा गया है कि वे ऐसी पोस्ट और हैंडल्स पर रोक लगाएं, जो युवाओं की बेरोजगारी, शासन-प्रशासन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाते हैं।

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कार्यकर्ताओं का तर्क है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल एक ऐसा माध्यम हैं, जो असल दुनिया में मौजूद जनता की शिकायतों को सामने लाते हैं। सोशल मीडिया पर होने वाली गतिविधियों को दबाने से पेपर लीक, रोजगार सृजन या संस्थागत पारदर्शिता जैसे मुख्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों का समाधान नहीं होता है।

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