Swasthya Sathi योजना में 30 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी, Bengal मंत्री का दावा

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पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के दौरान स्वास्थ्य साथी योजना में 25 से 30 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का दावा किया है। उन्होंने बताया कि सत्यापन के दौरान लाखों लाभार्थी कार्ड फर्जी पाए गए हैं और इस मामले में फॉरेंसिक ऑडिट शुरू किया गया है।

पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य बीमा योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने कहा कि भाजपा सरकार ने “25-30 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार” का पता लगाया है और लाखों लाभार्थी कार्ड “फर्जी’’ पाए गए हैं। मुखर्जी ने कहा कि ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना में ये “अनियमितताएं” तब सामने आईं, जब सरकार आयुष्मान भारत और राज्य की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत पात्र लाभार्थियों को कवरेज उपलब्ध कराने की तैयारी के बीच इसके डेटाबेस की जांच कर रही थी। मुखर्जी ने दावा किया कि पिछली सरकार ऐसे कार्डों से जुड़े बीमा प्रीमियम पर हर साल करीब 30 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी, जिनके लाभार्थियों का सत्यापन नहीं किया जा सकता था।

मंत्री ने शुक्रवार को कहा, “हम पहले ही 25-30 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार देख रहे हैं। यह टी20 क्रिकेट मैच नहीं है, इसलिए इसमें समय लगेगा। धीरे-धीरे आपको पता चलेगा कि और कितनी जानकारी सामने आती है।” मंत्री ने आरोप लगाया, “फर्जी कार्ड, लाभार्थी, मरीज, डॉक्टर, अस्पताल थे... और अलग-अलग स्तरों पर फर्जी जानकारी दी गई थी।” मुखर्जी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने “वित्तीय अनियमितताओं” का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक ऑडिट शुरू कर दिया है और योजना के डेटाबेस की भी जांच की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछली तृणमूल सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के लाभार्थियों के सत्यापन के दौरान भी “अनियमितताएं” सामने आई हैं।

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