Ayodhya में 30 लाख दीयों से सजेगा Deepotsav, तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे संत

अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और पूरी रामनगरी को 30 लाख दीयों से रोशन करने की योजना है। इस सांस्कृतिक उत्सव और व्यवस्थाओं को देखने के लिए जगतगुरु स्वामी सतीशाचार्य समेत कई प्रमुख संत भी रामनगरी पहुंच गए हैं। संतों ने इस भव्य आयोजन और युवाओं को सनातन परंपरा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।
अयोध्या (उप्र), सात नवंबर अयोध्या में भव्य दीपोत्सव-2026 के आयोजन में कुछ ही घंटे शेष हैं और भगवान राम की यह नगरी 30 लाख दीयों से रोशन होने के लिए तैयार है। घाटों से लेकर प्रमुख मार्गों और धार्मिक स्थलों तक रोशनी, सजावट और सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियां रामनगरी को एक अलग ही स्वरूप दे रही हैं। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव ने जिस तरह वैश्विक पहचान बनाई है, वह उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नयी ऊंचाई देने का उदाहरण बन रहा है।
दीपोत्सव के भव्य स्वरूप और तैयारियों को देखने के लिए जगतगुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज समेत कई संत भी अयोध्या पहुंच चुके हैं। दीपोत्सव के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार रखते हुए जगतगुरु स्वामी सतीशाचार्य ने कहा कि जिस तरह त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के आगमन पर अयोध्या दीपों से जगमगा उठी थी। आज योगी जी के प्रयासों से वही रामनगरी एक बार फिर पूरी दुनिया को प्रकाश का संदेश दे रही है।
जगतगुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज ने कहा कि सूर्यवंशी राजा प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में दीपावली का विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर देवी-देवताओं के नाम और उनकी संख्या के अनुरूप दीप प्रज्वलित करने की परंपरा आस्था और आध्यात्मिक चेतना को प्रकट करती है। अयोध्या का यह भव्य स्वरूप केवल आंखों को आकर्षित करने वाला दृश्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति है।
दीपोत्सव की भव्यता और अयोध्या के बदले स्वरूप की शशिकांत दास जी महाराज ने भी सराहना की। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई ‘‘अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी॥’’ का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के आगमन की सूचना मात्र से पूरी अवधपुरी आनंद और प्रसन्नता से भर उठी थी।
संत शशिकांत दास जी महाराज ने रामचरितमानस की चौपाई ‘‘राम राज बैठे त्रिलोका। हरषित भए गए सब सोका॥’’ और ‘‘बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप बिषमता खोई॥’’ का उल्लेख करते हुए कहा कि रामराज्य की परिकल्पना प्रेम, सद्भाव, समानता और सामाजिक समरसता पर आधारित है।
प्रभु श्रीराम के आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाने की क्षमता रखते हैं। संत आकाश दास जी महाराज ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले युवाओं के बीच धर्म, सनातन और संस्कृति को लेकर असमंजस की स्थिति थी। युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल उद्देश्यों से दूर होते जा रहे थे।
ऐसे समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खेवनहार की भूमिका निभाते हुए युवाओं को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया। आज दीपावली और देव दीपावली जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी और युवाओं का उत्साह इस बदलाव को दर्शाता है। युवाओं में अपनी संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।
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