अचानक ही ईरान पर पुतिन ने कर दिया बड़ा ऐलान, टेंशन में ट्रंप!

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के मॉस्को दौरे के बाद दोनों देशों के रणनीतिक संबंध और मजबूत होते दिख रहे हैं। रूस ईरान में आठ परमाणु संयंत्र तैयार करने में मदद के लिए वैज्ञानिकों की भर्ती कर रहा है। वहीं, ईरान ने अपना संवर्धित यूरेनियम किसी को भी सौंपने से साफ इनकार करते हुए अमेरिका को कड़े जवाब की चेतावनी दी है।
मॉस्को में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का रेड कारपेट वेलकम अपने आप में बहुत सारे संकेत दे जाता है। दुनिया जानती है रूस ईरान का समर्थक है। उसके दशकों से दोस्ताना संबंध है। वो दोस्ताना अंदाज रूसी राष्ट्रपति वलादमीर पुतिन के साथ मेल मुलाकात में भी साफ झलकता है। लेकिन पेजेश्कियान की मॉस्को यात्रा को लेकर कई कयास भी लगाए जा रहे हैं। मॉस्को में ईरानी राष्ट्रपति पुतिन होंगे अमेरिका से जंग में मददगार या अमेरिका साथ ईरान की डील कराएंगे। यह कयास इसलिए सबसे ज्यादा है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें कई चैनलों के जरिए हो रही है। लिहाजा यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या पुतिन, तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई डील करा पाएंगे?
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क्या इससे युद्ध का खतरा कम होगा और ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिल सकेगी। इस यात्रा के दौरान पुतिन ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनई को याद कर भावुक भी दिखे। अमेरिका और इजराइल ने जिस तरीके से औचक हमला कर खामनई की हत्या की थी। रूस ने इसकी सबसे पहले आलोचना की थी। इसे किसी दूसरे मुल्क में दखल अंदाजी करार दिया था। इसके बाद जंग छिड़ी तो कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि रूस अपने खुफिया सेटेलाइट के जरिए ईरान को अहम सूचनाएं दे रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में ईरान को गुपचुप तरीके से ड्रोन और इल्यूशन जैसे विमान भी सप्लाई करने का दावा किया गया। हालांकि ईरान यह दावा खुलेआम करता है। यूक्रेन के साथ जंग में ईरान ने रूसी सेना शाहिद जैसा ड्रोन दिया।
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रूस ने अपने परमाणु वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। ईरान की मदद के लिए रूस 800 नए वैज्ञानिकों की भर्ती करेगा। रूस के यह परमाणु वैज्ञानिक ईरान में आठ न्यूक्लियर प्लांट तैयार करेंगे। ईरान के पास घोषित तौर पर 440 किलो यूरेनियम 60% संवर्धित है। यूरेनियम जब 90% संवर्धित किया जाता है तो इससे एटम बम बनता है। रूस दशकों से परमाणु बम बनाने की तकनीक में माहिर है। रूस के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु बम इसकी संख्या 8000 तक बताई जाती है। तो क्या ईरान का यह सहयोगी उसे परमाणु तकनीक को बम बनाने के स्तर पर मदद करने वाला है? यह सवाल अमेरिका और इजराइल के लिए टेंशन बढ़ाने वाला है। क्योंकि 9 महीने की जंग और तनानी के बाद भी ना तो ईरान के संवर्धित यूरेनियम का पता लगाया जा सका ना इसे किसी बाहरी देश को सौंपने के लिए ईरान को राजी किया जा सका। बल्कि पजेशकियान ने मॉस्को दौरे से पहले ही कह दिया था ईरान अपना 1 ग्राम संवर्धित यूरेनियम भी किसी को नहीं देने वाला। इसके अलावा यूरेनियम पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर की गर्जना अलग सुनाई दी। आईआरजीसी के प्रवक्ता पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान से यूरेनियम छीनने के लिए अमेरिका ने हमला किया तो ऐसा बम मारेंगे जिसे दुनिया ने अब तक नहीं देखा होगा। अगर उनके पास मदर ऑफ ऑल बॉम्ब है तो हमारे पास फादर ऑफ ऑल बॉम्ब अभी से तैयार है।
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यह बात 100 फीसदी सही है। अगर अमेरिका ने अपना मदर ऑफ ऑल बॉम्ब पहले इस्तेमाल कर चुका है जैसे कि अफगानिस्तान और दूसरी जगहों पर तो अब हमारी बारी है फादर ऑफ ऑल बॉम्ब की ताकत दिखाने का। इसमें हमने एक का टेस्ट भी कर लिया। ईरानी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और परमाणु ठिकानों पर हमले की योजना बना चुके हैं। इसके लिए उन्होंने पूरा सीक्रेट सर्वे किया है। इसमें पहाड़ के भीतर स्थित पिकक्स माउंटेन नाम के संदिग्ध परमाणु ठिकाने का भी जिक्र है। क्योंकि अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी पहाड़ में ईरान ने संवर्धित यूरेनियम और दूसरे हथियार छिपा रखे हैं। इन पहाड़ों में सुरंग और बंकर इतने गहरे हैं कि ये जीबीयू 57 बंकर बस्टर बम से उड़ाए नहीं जा सकते। इस हमले के लिए ट्रंप यह कह चुके हैं कि अब तक का सबसे ताकतवर बम का इस्तेमाल करेंगे।
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