पुतिन का खौफनाक इशारा, पीस डील से पहले रख दी बहुत बड़ी शर्त, कुछ बड़ा होने वाला है...

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के शांति प्रयासों के बावजूद पुतिन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेनी इलाकों पर नियंत्रण और सुरक्षा गारंटी की परस्पर विरोधी शर्तों के कारण कोई समाधान नहीं निकल सका है। नतीजतन, दोनों देश अब भी एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
पिछले कई सालों से जिस जमीन को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच घमासान जारी है वो क्या कभी खत्म भी होगा? यह सवाल इसीलिए कि इतनी लंबी जंग में यूक्रेन अपना खजाना और हथियार भंडार फूंक चुका है तो रूस को भी इस जंग की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। इस जंग के साथ दुनिया में तेल, व्यापार और अनाज संकट पैदा हुआ सो अलग। इसीलिए दुनिया भर के जानकार मानते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता बेहद जरूरी है। यह ना सिर्फ रूस और यूक्रेन के हित में है बल्कि यूरोप और एशिया के साथ तमाम विकासशील देशों के लिए भी फायदेमंद होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग के इसी स्थाई समाधान के लिए मॉस्को में अपना विशेष दूत भेजा। पुतिन को शांति समझौते के लिए तैयार किया। इसका ऐलान खुद डोनल्ड ट्रंप ने किया। ट्रंप जिस वक्त ये ऐलान कर रहे थे, उसी रात पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर नए हमलों का आर्डर दे दिया। इन हमलों को पहले रूसी सेना की रूटीन कारवाई माना गया। लेकिन अब रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने हमले से भी बड़ा खतरनाक संकेत दिया। पुतिन जंग से पीछे नहीं हटेंगे। इस बयान से मिला घातक संकेत।
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यूक्रेन और रूस के बीच जंग का मूल कारण यह दक्षिणी और पूर्वी इलाका ही है जिसे रूस ऐतिहासिक रूप से अपना हिस्सा मानता है। वैसे तो पूरा यूक्रेन ही सोवियत रूस का हिस्सा था। लेकिन अलग देश बनने के बाद सब कुछ साफ हो गया। रूस अलग और यूक्रेन की संप्रभुता अलग। लेकिन बात तब बिगड़ी जब रूसी प्रभाव से बाहर जाकर यूक्रेन ने पश्चिमी देशों के संगठन नाटो का हिस्सा बनने की कोशिश की। इस बात से नाराज पुतिन ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया और एक साल के भीतर यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया जो आज तक बरकरार है। इस ग्राफिक्स इनफो से समझिए पुतिन आखिर यूक्रेन के किन इलाकों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। रूस ने इसे 2014 में अपने अधिकार में लिया। लोहांस इसके अधिकांश हिस्से पर रूसी सेना का नियंत्रण है। दोस्क इस क्षेत्र के बड़े हिस्से पर रूस का कब्जा है। यह दोनों इलाके मिलकर डोनबास क्षेत्र बनाते हैं। जेपोरीजा इस क्षेत्र के बड़े हिस्से पर रूसी सेना का नियंत्रण है और खैरसोन इस दक्षिणी हिस्से के अधिकांश हिस्से पर रूस का कब्जा है। यूक्रेन ने 2022 के अंत में खैरसोन को वापस अपने नियंत्रण में लिया था। लेकिन खैरसोन समेत सभी पूर्वी और दक्षिणी हिस्से को रूस अपनी ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा मानता है।
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यूक्रेन का दावा है कि इन इलाकों पर कब्जा उसकी संप्रभुता पर हमला है और इसके खिलाफ वो आखिरी दम तक लड़ेगा। जेलस्की ने दावा किया कि अगर अमेरिका और पश्चिमी देश रूस के साथ सई सीएस फायर कराना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी पुख्ता करनी होगी। तो क्या यूक्रेन की इन शर्तों पर रूस तैयार होगा या रूस के जीते हुए इलाके न छोड़ने की बात पर यूक्रेन राजी होगा। पिछले 4 वर्षों में इन शर्तों पर कई बार बात हो चुकी है। लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस बेनतीजा बातचीत के बीच रूस और यूक्रेन दोनों ने एक दूसरे पर हमले जारी रखे। अब बात एक दूसरे के ऊर्जा ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करने तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अमेरिका की एंट्री इस बार निर्णायक हो सकती है क्योंकि ट्रंप ने रूस के साथ डीजल खरीदने का बहुत बड़ा सौदा किया है। ट्रंप कतई नहीं चाहेंगे कि रूस के ऊर्जा ठिकाने यूक्रेन की बमबारी में तबाह हो।
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