We Will Kill Trump....मिड टर्म चुनाव में झटका लगते ही ईरान में लगे पोस्टर्स

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अभिनय आकाश । Nov 4 2026 12:34PM

तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी देने वाले विशाल बिलबोर्ड लगाए गए हैं, जहां लोग खामनेई की मौत का बदला मांग रहे हैं। इस तनाव और हालिया अमेरिकी हमलों के बीच, क़तर की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच संभावित समझौते को लेकर बातचीत भी चल रही है।

ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी देने वाला एक बिल बोर्ड लगाया गया है जिस पर लिखा है वी विल किल ट्रंप यानी हम ट्रंप को मार डालेंगे। बिलबोर्ड में ट्रंप को एक कैदी की तरह दिखाया गया है। उनके साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की खून से सनी तस्वीरें भी लगाई गई हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर ईरान ऐसा करके अमेरिका को क्या मैसेज देना चाहता है?3 नवंबर को तेहरान के मशहूर एंगलाब स्क्वायर में यह विशाल बिल बोर्ड लगाया गया। इस पर ट्रंप का सिर झुका हुआ है और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे दिखाया गया है। आसपास लगे दूसरे पोस्टर में ट्रंप, जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और बेंजामिन नेतन्याहू के चेहरे भी खून से सने नजर आते हैं। उनके पीछे अमेरिका और इजराइल के फटे हुए झंडे भी दिखाई देते हैं। इस दौरान स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। उनके हाथों में लाल झंडे थे। वो देयर विल बी ब्लड यानी खून बहेगा जैसे नारे लगा रहे थे। लोग ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिनी की मौत का बदला लेने की मांग कर रहे थे। 

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खामनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच में हुई थी। इसी के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ था। लेकिन तेहरान में ट्रंप के खिलाफ इस तरह के पोस्टर पहली बार नहीं लगे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की राजधानी में कई मौकों पर ऐसे पोस्टर और प्रदर्शन देखने को मिले हैं। कहीं ट्रंप को ताबूत से बाहर निकलते हुए दिखाया गया तो कहीं जेल की कोठरी में बंद दिखाया गया। 2 नवंबर को तेहरान के ताजरीश स्क्वायर में एक आर्ट एग्बिशन भी लगाई गई। इसमें ट्रंप की खून से सनी तस्वीरें डिस्प्ले की गई। एक तस्वीर में उनके चेहरे पर पैर रखा हुआ भी दिखाया गया। दूसरी तस्वीर में बम से उनका चेहरा ढका हुआ था। ईरान में सार्वजनिक जगहों पर इस तरह के पोस्टर और म्यूरल लंबे समय से राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं। इनका मकसद अपने समर्थकों में जोश पैदा करना और विरोधियों को चुनौती देना होता है। लेकिन इस बार इन पोस्टर्स की टाइमिंग काफी अहम है। क्योंकि एक तरफ तेहरान की सड़कों पर अमेरिका के खिलाफ गुस्सा दिखाया जा रहा है तो दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत भी चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि ईरान के साथ समझौता हो सकता है। 2 नवंबर को भी उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच डील पॉसिबल है। इस बातचीत में क़तर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। क़तर के जरिए दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है। 3 नवंबर को क़तर ने उम्मीद जताई कि दोनों देश किसी अंतरिम समझौते पर पहुंच सकते हैं।

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क़तर के मुताबिक दोनों पक्ष उसके प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं। लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए और उसके जो पोर्ट हैं वहां जो नौसैनिक की नाकेबंदी है वो खत्म करे और जो भी फ्रीज किया हुआ ईरानी फंड है वो रिलीज करें। इसके बदले में ईरान स्टेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होती तब तक समझौता आसान नहीं है और इसी बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान पर सैन्यकारी कारवाई भी कर दी है। 2 नवंबर को अमेरिका ने ईरान के केशम आइलैंड पर सीमित हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे डिफेंसिव स्ट्राइक यानी रक्षात्मक हमला बताया है। उनका दावा था कि ईरान की तरफ से अमेरिकी विमान और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का खतरा था। इसलिए अमेरिकी सेना ने वहां मौजूद मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमले ऐसे वक्त में हुए जब ट्रंप ईरान के साथ समझौते की बात कर रहे थे। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह साफ किया कि इन हमलों का मतलब बड़े पैमाने पर युद्ध को दोबारा शुरू करना नहीं है।

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ईरान ने इन हमलों की निंदा की है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबादी ने कहा कि जब तक सैन्य हमले पूरी तरह से बंद नहीं होते तब तक ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका में 3 नवंबर को मिड टर्म इलेक्शन भी हुए। इन चुनावों में राष्ट्रपति नहीं चुना जाता बल्कि अमेरिकी संसद के दोनों जो सदन है यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सेनेट की सीटों के लिए वोटिंग होती है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है। शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेट्स को कुछ अहम सीटों पर कामयाबी मिली है।

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