इस कमरे में भारत-इजरायल ने मचाया तहलका, दिमाग हिल जाएगा!

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अभिनय आकाश । Nov 3 2026 7:37PM

संयुक्त राष्ट्र में पारंपरिक हथियारों को सीमित करने वाले पाकिस्तानी प्रस्ताव के खिलाफ केवल भारत और इजराइल ने वोट दिया, जबकि 180 देशों ने इसका समर्थन किया। भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि वह अपनी रक्षा क्षमताओं को सीमित नहीं करेगा। अपनी समान रणनीतिक चुनौतियों के चलते इजराइल ने भी इस प्रस्ताव को खारिज किया।

संयुक्त राष्ट्र के इस हॉल में प्रस्ताव को पास करवाने के लिए दुनिया के सभी देशों को वोटिंग के लिए बुलाया गया। सभी देशों के डिप्लोमेट्स पहुंच गए। यहीं पर कहीं भारत और इजराइल के डिप्लोमेट्स भी बैठे थे। प्रस्ताव पर वोटिंग शुरू हुई और फिर भारत इजराइल ने ऐसा खेल किया जिसे देखकर कई देश उछल पड़े। दरअसल इस हॉल में जिस प्रस्ताव पर वोटिंग हो रही थी उसे मुख्य रूप से पाकिस्तान लेकर आया था। अब अगर कोई प्रस्ताव पाकिस्तान जैसा मक्कार देश ला रहा है तो उसके निशाने पर कहीं ना कहीं भारत होना ही था और इस हॉल में यही हुआ। पाकिस्तान द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का कहना था कि दुनिया के अलग-अलग देशों में पारंपरिक हथियारों जैसे टैंक, मिसाइल और बंदूकों की संख्या पर काबू रखा जाए और सभी पड़ोसी देश आपस में हथियारों का संतुलन बनाए रखें। यानी भारत ज्यादा हथियार ना बनाए और अगर बनाने हैं तो पहले पाकिस्तान के साथ बैठकर यह डिसाइड कर ले कि कितनी मिसाइलें, टैंक और बंदूके बनानी है। हैरानी की बात देखिए कि 182 देशों को वोटिंग के लिए बुलाया गया था। इनमें से 180 देशों ने पाकिस्तान के इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। लेकिन पूरी दुनिया में इस प्रस्ताव के खिलाफ सिर्फ और सिर्फ भारत और इजराइल ने वोट किया।

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जाहिर सी बात है कि भारत कभी भी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र और कई देश भारत को इस पाकिस्तानी प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालने के लिए कन्विंस कर रहे थे। लेकिन भारत टस से मस नहीं हुआ। कई एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह पूरा आईडिया दरअसल चीन का था और चीन ने पाकिस्तान के जरिए यह प्रस्ताव पेश किया। दरअसल भारत की मिसाइलों, टैंको, आर्टिलरी गंस और एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तान से ज्यादा चीन परेशान है। भारत ने पिछले कुछ सालों में इतनी स्वदेशी मिसाइलों के परीक्षण कर लिए हैं जो चीन के अंदर तक घुसकर मार सकती हैं। भारत ने तो चीन के पड़ोसी देशों में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात करनी शुरू कर दी हैं। इसीलिए चीन चाहता था कि भारत पाकिस्तान के इस प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग करें। मजे की बात देखिए कि चीन ने तो रूस को भी साइन करने के लिए मना लिया। जबकि रूस तो अपने पड़ोसी यूक्रेन से परेशान है। लेकिन भारत के डिप्लोमेट अनमोल शेर बेदी ने साफ कहा कि हमारी सुरक्षा सिर्फ पाकिस्तान बॉर्डर को देखकर तय नहीं हो सकती। हमारी चिंताएं इस क्षेत्र से बाहर भी हैं। यहां भारत का इशारा चीन था। ऐसे में भारतीय डिप्लोमेट ने कहा कि हम सिर्फ अपने पड़ोसियों के हिसाब से हथियारों को सीमित करने का कोई नियम नहीं मानेंगे।

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अनमोल शेर बेदी ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र को भी यह बताना चाहते हैं कि पाकिस्तान इस बिल के जरिए सिर्फ अपनी कूटनीति चमकाना चाहता है लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। भारत किसी भी ऐसे नियम का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा हो। आपको बता दें कि अगर भारत इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट कर देता तो नैतिक रूप से भारत आधुनिक टैंक, लड़ाकू विमान या मिसाइलों को ना तो खरीद पाता और ना ही टेस्ट कर पाता। भारत के हथियार बेचने और खरीदने दोनों की क्षमताओं पर बहुत गंभीर अंतरराष्ट्रीय और कानूनी बंदिशें लग जाती। इसका सबसे बड़ा फायदा चीन और पाकिस्तान को ही मिलता। मगर भारत ने अकेले ही इस बिल के खिलाफ वोट डाल दिया। इसी के तुरंत बाद इजराइल ने भी भारत का साथ दे दिया। इजराइल ने कहा कि हम भी इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाल रहे हैं क्योंकि हमारी सुरक्षा, चुनौतियां और रणनीतिक स्थिति काफी हद तक भारत जैसी ही है। अगर हम भी अपने पड़ोसी देशों के साथ तालमेल बिठाकर हथियारों की संख्या सीमित कर लेंगे तो हमसे काफी दूर बैठा ईरान हम पर हमले शुरू कर देगा।

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