7 नवंबर को साइन होगी तबाही की फाइल! ट्रंप के प्लान ने उड़ाए होश

अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन का दावा है कि अमेरिका ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमले की तैयारी कर रहा है। कहा जा रहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपनी सत्ता बचाने के लिए ट्रंप पर इस सैन्य कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं। इस संभावित हमले से वैश्विक अशांति फैलने और भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
अमेरिका के दक्षिणपंथी पत्रकार और कभी ट्रंप के कट्टर समर्थक रहे चकर कार्लसन बता रहे हैं कि अमेरिका ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु संयंत्रों पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। ओ इस खबर ने एक बार फिर से दुनिया में अशांति का डर पैदा कर दिया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका में मिड टर्म चुनाव में ट्रंप को बड़ा झटका लगने वाला है। तो क्या चुनावों में हार को पलटने और नैतन्याहू की कुर्सी को बचाए रखने के लिए ट्रंप परमाणु हमले जैसा विनाशकारी फैसला लेंगे? कहा यही जा रहा है कि अमेरिका में मिड टर्म चुनाव के बाद ट्रंप उस फाइल पर साइन कर सकते हैं जो ईरान के परमाणु संयंत्रों को बर्बाद कर देगा। जिससे ईरान सदियों तक बर्बादी से उबर नहीं पाएगा। ट्रंप के करीबी भी इस आशंका से इंकार नहीं कर रहे। नेतन्याहू को भी ऐसे पागलपन की सख्त जरूरत है जिससे वो अगले कुछ महीने या कुछ साल सत्ता पर बने रह सके। सवाल है कि ट्रंप और नेतन्याहू की सनक और पागलपन का खामियाजा भुगतेगा कौन?
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एक तो यह कि ईरान इसकी मार सबसे ज्यादा झेल। लेकिन बारूदी ज्वाला भड़कने से इसका असर भारत पर भी पड़ेगा। इससे आर्थिक स्थिति भारत की और ज्यादा डामामडोल होगी। वैश्विक व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। सामान महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ने का खतरा आने वाले समय में दूसरे देशों में भी होगा। अगर यह लड़ाई रुक सकती है तो इससे बढ़िया कोई बात नहीं है। लेकिन क्योंकि दोनों के ही हारने की संभावना है। जैसे न्या को भी परेशानी आ रही है अपनी सरकार बनाने में और प्रेसिडेंट ट्रंप का भी मिड टर्म में लगता नहीं है कि वो कांग्रेस में उनकी मेजॉरिटी आ पाएगी। सवाल है कि अमेरिकी सेना मध्यावधि चुनाव के बाद ही परमाणु विध्वंस क्यों लाएगी? इन दावों का आधार आखिर क्या है और वो कौन सी ऐसी वजह हैं जिनसे अमेरिका को 81 साल बाद सर्वनाश का हथियार फिर से इस्तेमाल करने की दहलीज पर ला खड़ा किया।
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टकर कालसन का दावा है कि नेतयाहू ट्रंप को लगभग रोज फोन करते हैं जो ईरान में मौजूद अंडरग्राउंड ठिकाने पर हमले का दबाव डाल रहे हैं। ट्रंप अभी हिचकिचा रहे हैं। लेकिन 7 नवंबर तक फैसला ले सकते हैं। क्योंकि पीट हेक्सेट और ब्रेड क्रू पर नए हमलों के समर्थन में है। जबकि उपराष्ट्रपति जे वेंस और स्टीव विटकॉफ समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं। दावा है कि ट्रंप कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमले का फैसला ले सकते हैं। और सवाल यह कि इन खबरों को चुनाव की वजह से प्लांट करवाया जा रहा है या फिर सच में ईरान पर परमाणु विस्फोट वाली तबाही का खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि दावा यह किया जा रहा है कि नेतयाहू अमेरिका के मिड टर्म चुनाव यानी कि आज होने वाले चुनाव के तुरंत बाद ईरान पर हमला करने का दबाव बना रहे हैं। जबकि ट्रंप फिलहाल बातचीत को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। जिससे नेतन्याहू की चिंता बढ़ गई।
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नेतन्याहू की इजराइल में वापसी होती दिखाई नहीं दे रही। चुनावी परिणामों के बाद साफ है कि नेतयाहू को सत्ता में वापसी का मौका मिलता नहीं दिख रहा क्योंकि अमेरिका पर नेतयाहू हमला करने का दबाव इसीलिए बना रहे हैं ताकि उनको कुछ और दिन सत्ता में रहने का मौका मिल जाए। बहुत ही शातिर पॉलिटिकल खिलाड़ी हैं और मेरा मानना है कि वो कोई भी कोशिश करेंगे ताकि किसी भी तरह से पावर में रह सके क्योंकि यह वर्डिक्ट इस तरह का है कि कोई पार्टी को आसान नहीं है और फिर देखिएगा कि उसमें जो एक ग्रे ज़ोन वारफेयर होता है एक तरह का नैरेटिव है कि अरब पार्टीज के साथ मिलकर के कर रहे हैं।
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