Nepal Flash Flood: रसुवा और नुवाकोट में तबाही, 4 की मौत और 13 हाइड्रो प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त

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तिब्बत सीमा से लगे मध्य नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से आई भीषण बाढ़ में कम से कम चार लोगों की जान चली गई। इस आपदा के कारण 13 जलविद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ कई बस्तियों, पुलों और चौकियों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टरों की मदद से बड़ा खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया है।

(इंट्रो में एक शब्द बदलते हुए) काठमांडू, 26 अगस्त तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के दो जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ में चार लोगों की मौत हो गई। बाढ़ से नदी किनारे बसी बस्तियों में भारी तबाही हुई और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले तथा काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला प्रभावित हुआ।

उन्होंने बताया कि रसुवा में बाढ़ क्षेत्र में बारिश के कारण नहीं आई, बल्कि संभवतः तिब्बत की ओर हुई भारी बारिश या हिमस्खलन के कारण आई है। हालांकि, इसका सटीक कारण अभी पता नहीं चल पाया है। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना की मदद से अधिकारियों ने खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है।

रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत कई निचले जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल सेना ने एक बयान में बताया कि अचानक जलस्तर बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी तबाही हुई तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। सबसे अधिक प्रभावित रसुवा जिला है, जो काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तिब्बत सीमा के पास स्थित है।

बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं प्रवक्ता ने पीटीआई-को बताया कि अचानक आई बाढ़ के बाद नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका से तीन पुरुषों और एक महिला के शव बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि बाढ़ के तुरंत बाद उनके शव त्रिशूली नदी के पास पड़े मिले। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएम) ने एक बयान में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगली सूचना तक हाई अलर्ट पर रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा।

जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में हुई बारिश के कारण नहीं आई। विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ के अनुसार, ऐसा प्रतीत नहीं होता कि रसुवा में हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ आई। उन्होंने कहा कि संभवतः यह किसी नए हिमनद के बनने या पुराने ग्लेशियर के फटने के कारण आई हो।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी इस मामले का अध्ययन कर रहे हैं, इसलिए वास्तविक कारण अभी पता नहीं चला है।’’ उन्होंने कहा कि तिब्बत की ओर से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए ‘‘हमें सतर्क रहने की जरूरत है।’’ ‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, अचानक जलस्तर बढ़ने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह त्रासदी हिमनद तटबंध बाढ़ (जीएलओएफ) या किसी अन्य कारण से आई। रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से बहुत अधिक था और दोनों बस्तियों में काफी नुकसान हुआ है।

रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी नष्ट हो गया। यह स्थान तिब्बत, चीन से जुड़ा नेपाल के व्यापारिक आवागमन को नियंत्रित करता है।

इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में 354 मेगावाट की कुल क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ ने उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चमेली गुरूंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पाइरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।

स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया। सेना के एक बयान के अनुसार, नेपाल की सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए। रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया।

बयान में कहा गया कि नेपाल सेना ने त्रिशूली में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र नंबर-1 में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। उसने बताया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना के एक हेलीकॉप्टर (एमआई-17) को भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। स्थानीय मीडिया की एक खबर में नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभि नारायण काफ्ले के हवाले से बताया गया कि तिमुरे स्थित क्षेत्र पुलिस कार्यालय, स्याफ्रुबेसी की पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी की पुलिस चौकी भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।

सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि अचानक आई बाढ़ के बाद रसुवा से सशस्त्र पुलिस बल के चार जवान लापता हैं। घायलों के इलाज के लिए पांच चिकित्सकों समेत 16 स्वास्थ्यकर्मियों की एक टीम रसुवा के प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है। भीषण बाढ़ ने धादिंग जिले के गजुरी में एक पुल को बहा दिया है।

बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए पांच ड्रोन तैनात किए गए हैं। लापता लोगों का पता लगाने के लिए तीन स्निफर डॉग भी प्रभावित क्षेत्र में भेजे गए हैं। पिछले साल भी भोटे कोशी में बाढ़ आई थीं, जिनसे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

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