क्यों ठुकराई PM की कुर्सी? प्रियंका पर राहुल को तरजीह, बच्चन परिवार से क्यों बिगड़े रिश्ते, 10 नवंबर को सोनिया गांधी बड़ा खुलासा करने वाली हैं!

Sonia Gandhi
ANI/Belonging A Journey Of Love
अभिनय आकाश । Aug 24 2026 2:16PM

10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली किताब को लेकर सोनिया गांधी कहती हैं कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया। लेकिन उनके इरादों, काम औऱ मानवीय पहलुओं को उस तरह नहीं समझा गया। कई मायनों में ये किताब उनकी इंसानियत को समर्पित है। जब मैंने राजनीति से कुछ दूरी बनाकर पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखा तो मुझे अपनी कहानी में प्यार और वफादारी का एक दागा साफ नजर आया। ये धागा इटली के एक छोटे शहर से बिताए साधारण बचपन से शुरू होकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए तक जाता है।

भारतीय राजनीति में ये सवाल अक्सर पूछा जाता है कि आखिर सोनिया गांधी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनीं? साल 2004 में यूपीए गठबंधन के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सोनिया ने पीएम की कुर्सी क्यों ठुकरा दी? सोनिया गांधी ने प्रियंका के बदले राहुल को क्यों राजनीति में आगे किया। जब राहुल को आगे कर ही दिया तो फिर मनमोहन सिंह की सरकार में उन्हें कभी मंत्री क्यों नहीं बनने दिया? सोनिया जब पीएम नहीं बनी तो पहले दावेदार तो प्रणव मुखर्जी थे पर उन्होंने मनमोहन सिंह का नाम क्यों फाइनल करवा दिया? सवाल ये भी पूछा जाता है कि डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री तो बने लेकिन बागडोर सोनिया के ही हाथ में रही।  इन सबके बीच में पारिवारिक दोस्त रहे अमिताभ बच्चन से उनके रिश्ते किस बात पर बिगड़े? सोनिया गांधी से जुड़े जितने भी सवाल हैं, उन सभी सवालों से अब पर्दा उठने वाला है। सोनिया गांधी ये वो नाम है जो 80 के दशक से ही भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा और आज भी है। दरअसल,कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने  संस्मरण में निजी जिंदगी से लेकर राजनीति तक के सफर की कहानी बताने जा रही हैं। ये कहानी किसी मीडिया ब्रीफ्रिंग या वीडियो के माध्यम से नहीं नहीं बल्कि अपनी किताब बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव के माध्यम से बताइंगी। सोनिया के जीवन पर लिखी किताब 10 नवंबर को वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त पब्लिशर अल्फ्रेड ए नोफ के प्रकाशन से जारी होगी। इसमें नेहरू, गांधी परिवार में शादी के बाद का जीवन, राजनीति में प्रवेश और प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं। 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली किताब को लेकर सोनिया गांधी कहती हैं कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया। लेकिन उनके इरादों, काम औऱ मानवीय पहलुओं को उस तरह नहीं समझा गया। कई मायनों में ये किताब उनकी इंसानियत को समर्पित है। जब मैंने राजनीति से कुछ दूरी बनाकर पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखा तो मुझे अपनी कहानी में प्यार और वफादारी का एक दागा साफ नजर आया। ये धागा इटली के एक छोटे शहर से बिताए साधारण बचपन से शुरू होकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए तक जाता है। 

इसे भी पढ़ें: Cheeni Kum hai! एथनॉल का असर या त्योहारों का, अचानक क्यों आसमान छूने लगे चीनी के दाम? 10 लाइन में समझें पूरा मामला

सोनिया की ताजपोशी और केसरी  जबरन पार्टी दफ्तर में नजरबंद

सोनिया गांधी ने सक्रिय राजनीति में एंट्री का फैसला किया तो केसरी के ना चाहते हुए भी पार्टी ने सोनिया को पार्टी प्रमुख बना दिया। इसकी भी एक दिल्चस्प कहानी है जब 1997 के आखिर में सोनिया गांधी ने घोषणा की कि वो कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगी। तब कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने सोनिया को कांग्रेस के लिए 'तारणहार' बताते हुए पार्टी में उनका स्वागत तो किया। लेकिन जब सोनिया को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठी, तब केसरी ने हिचकिचाहट ज़ाहिर की। कहते हैं जिस दिन सोनिया पार्टी अध्यक्ष चुनी गई केसरी को जबरन पार्टी दफ्तर में नजरबंद रखा था। 

पवार-अनवर-संगमा का विरोध, सोनिया का इस्तीफा

शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने विदेशी होने के कारण सोनिया को पीएम के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट किए जाने का विरोध किया तो सोनिया ने पार्टी प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। तीनों बागियों को कांग्रेस से निकाले जाने के बाद सोनिया ने इस्तीफा वापस लिया।

इसे भी पढ़ें: जयपुर से लेकर भोपाल और गया से उन्नाव तक...Gen Z तो झांकी थी, पूरी पिक्चर दिखा रहे Gen अल्फा?

आखिर क्यों नहीं पीएम बन पाईं सोनिया?

2004 का लोकसभा चुनाव अटल बिहारी वाजपेयी के सामने सोनिया गांधी की राजनीतिक हैसियत बहुत छोटी थी। अटल जी ने देश को इंडिया शाइनिंग का नारा दिया यानी की उनके कार्यकाल की वजह से देश चमक रहा है। ये पॉजिटिव कैंपेन था लेकिन इसका असर नेगेटिव हो गया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कद्दावर नेता के लिए एनडीए की सरकार हार गई। किसी ने सोचा भी नहीं था कि सोनिया गांधी अटल बिहारी वाजपेयी के सामने कांग्रेस को जीत दिलाईंगी। उन्हीं के फॉर्मूले पर एनडीए की जगह यूपीए बनेगी। इसके साथ ही उसके अंतर्गत एक गठबंधन की सरकार देश में बनेगी। ये सोनिया गांधी के युग की शुरुआत थी और गांधी परिवार के शीर्ष पर आने की वापसी। जब 2004 में कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में आई कांग्रेस ही नहीं उसके तमाम

सहयोगी दल भी जब यह चाहते थे कि सोनिया गांधी ही प्रधानमंत्री बने, तो फिर उन्होंने ना क्यों कह दिया? ना कहा भी तो प्रधानमंत्री पार्टी की तरफ से कौन होगा? यह तो चुनने का अधिकार उन्हीं के पास था। स सबसे सीनियर प्रणव मुखर्जी थे। अनुभवी थे। फिर सोनिया ने उनकी जगह मनमोहन सिंह का नाम पीएम के लिए आगे क्यों बढ़ाया? क्या इसलिए कि सोनिया को उन पर ज्यादा भरोसा था? उन पर जो सुपर पीएम होने के इल्जाम लगते हैं, उसमें किस हद तक सच्चाई है? 

प्रियंका के बदले राहुल को क्यों राजनीति में आगे किया

जब सोनिया गांधी के सामने उत्तराधिकार की बात आई, उनके सामने दो विकल्प थे। राहुल और प्रियंका। तो सोनिया गांधी ने प्रियंका के बदले राहुल को क्यों आगे किया? वह भी तब जब प्रियंका के बारे में कहा जाता था कि उनमें उनकी दादी इंदिरा गांधी का अक्ष दिखता है। राहुल को हमेशा से ही राजीव का राजनीतिक उत्तराधिकारी मान लिया गया था। या फिर यह सोनिया गांधी का ही फैसला रहा कि राहुल ही आगे पार्टी को लीड करेंगे। अगर सोनिया ने किसी मकाम पर यह तय भी कर लिया कि राहुल ही आगे पार्टी का सारा कामकाज देखेंगे तो जब मौका था मतलब यूपीए की सरकार थी। सोनिया सबसे ताकतवर थी। तो उन्होंने राहुल को कभी मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री क्यों नहीं बनने दिया? जबकि उस वक्त के कई सीनियर नेताओं ने भी यह मांग उनसे की थी। 

इसे भी पढ़ें: शिखा है, जनेऊ पहनते हैं? PM ने राम के मर्म को अयोध्या में समझाया, वो क्या इंटरव्यूअर्स को समझ नहीं आया, मंदिर का नया CEO ब्राह्मण ही बनेगा?

कांग्रेस ही नहीं 544 पन्नों वाली ऑटोबायोग्राफी पर बीजेपी की भी नजर 

इन सवालों का जवाब उम्मीद की जा रही है कि 10 नवंबर को मिले। कांग्रेस ही नहीं बीजेपी की भी नजर सोनिया गांधी की इस 544 पन्नों वाली ऑटोबायोग्राफी पर है जो अल्फ्रेड ए नो पब्लिशिंग हाउस से छप रही है। अहम बात यह है कि अपने करियर के आखिरी मोड़ पर सोनिया गांधी जो किताब लिख रही हैं उसमें सच्चाई कितनी है और अपनी छवि बेहतर करने की कोशिश कितनी?

All the updates here:

अन्य न्यूज़