चाबहार का इतना भयंकर बदला, ईरान ने 15 मिनट में 60 फाइटर जेट उड़ाए? हिल गए ट्रंप

ईरान ने अमेरिका से ऐसा बदला लिया है कि जिसने ट्रंप को भी हिलाकर रख दिया है। पहली बार ईरान के रौद्र रूप को देखकर सब हैरान हैं। दरअसल हमलों का बदला लेते हुए ईरान ने अमेरिका के कई लड़ाकू विमानों को तबाह कर दिया है। वो फाइटर जेट्स जिन पर ट्रंप सबसे ज्यादा गुरूर करते थे।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई जंग ने खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया है। इस बार हमले इतने डेंजर हैं कि भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ घंटे पहले ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए अमेरिका ने स्ट्राइक की थी। इस हमले में भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को तगड़ा नुकसान पहुंचा। जिसमें आठ लोगों की मौत हुई जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। लेकिन अब ईरान ने अमेरिका से ऐसा बदला लिया है कि जिसने ट्रंप को भी हिलाकर रख दिया है। पहली बार ईरान के रौद्र रूप को देखकर सब हैरान हैं। दरअसल हमलों का बदला लेते हुए ईरान ने अमेरिका के कई लड़ाकू विमानों को तबाह कर दिया है। वो फाइटर जेट्स जिन पर ट्रंप सबसे ज्यादा गुरूर करते थे।
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अब इन्हीं लड़ाकू विमानों को एक झटके में ही ईरान ने धुआधुआ करते हुए मिट्टी में मिला दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में खड़े हुए कई अमेरिकी सैन्य फाइटर जेट्स को बैलस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। जिसमें कई अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट तबाह हो गए। इसके अलावा कई और को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। इस हमले में कई बैलेस्टिक मिसाइलों बड़ी संख्या में ड्रोंस का इस्तेमाल हुआ है। दरअसल ईरान ने यह हमला उन हमलों के जवाब में किया है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने हमलों को बढ़ाते हुए पुलों एनर्जी साइड्स को निशाना बनाया और साथ ही चाबहार पोर्ट पर एक टावर गिरा दिया। चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। इस टावर को गिराने के लिए अमेरिका ने एक नहीं तीन-तीन बार हमले किए। चाबहार ईरान का वह इलाका है जहां भारत का तगड़ा निवेश है। यहां भारत 120 मिलियन डॉलर यानी कि लगभग निवेश कर चुका है।
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अमेरिका के इस हमले में भारत का निवेश भी प्रभावित हुआ है। अमेरिकी हमले में जो मेरिटाइम ट्रैफिक टावर गिरा है वह शाहिद टर्मिनल पर ही बना हुआ है। शाहिद टर्मिनल को भारत ने ही बनाया है। चाबहार पोर्ट को नुकसान पहुंचना इससे सीधे तौर पर पाकिस्तान और चीन को फायदा पहुंचने वाला है। क्योंकि भारत की ओर से खाली की गई जगह और पोर्ट के निष्क्रिय होने की स्थिति में ईरान पर प्रभाव रखने वाला चीन इस रणनीतिक क्षेत्र में अपने पैर पसार सकता है। इससे हिंद महासागर और मध्य पूर्व में भारत की सुरक्षा को भी चुनौती मिलेगी। दरअसल ईरान भी लगातार अमेरिका को सबक सिखा रहा है। हाल ही में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइल हमले किए हैं जिसमें क़तर भी शामिल है। हमलों में कुवैत में एक पावर और वाटर डिसलिनेशन प्लांट को भी नुकसान पहुंचा है।
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