धोखेबाज...अब तो यहूदी भी तुमसे तंग आ गए, ट्रंप ने नेतन्याहू को लताड़ दिया

किताब के मुताबिक यह घटना उस समय की है जब अमेरिका गाजा में युद्ध विराम कराने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान इजराइल ने हमास नेताओं को निशाना बनाने के लिए क़तर पर हमला कर दिया। इस हमले में हमास के कुछ सदस्य मारे गए लेकिन एक कतरी सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई।
दुनिया को हमेशा यही दिखा कि डोनाल्ड ट्रंप और बेंजमीन नेतन्याहू की जोड़ी सबसे मजबूत थी। ईरान पर हमला हो या गाजा युद्ध दोनों नेता अक्सर एक ही रणनीति पर चलते नजर आए। लेकिन अब एक नई किताब ने इस रिश्ते की दूसरी तस्वीर सामने रख दी है। दावा किया गया है कि एक वक्त ऐसा भी आया जब खुद डोनाल्ड ट्रंप अपने सबसे करीबी सहयोगी माने जाने वाले नेतन्याहू पर बुरी तरह भड़क गए थे। यहां तक कि फोन पर उन्होंने कह दिया हर कोई तुमसे तंग आ चुका है। सभी यहूदी भी तुमसे परेशान हैं। यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोना फनसवान की किताब रिजीम चेन इनाइड द एंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों के कई अंदरूनी घटनाक्रमों का जिक्र है। किताब के मुताबिक यह घटना उस समय की है जब अमेरिका गाजा में युद्ध विराम कराने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान इजराइल ने हमास नेताओं को निशाना बनाने के लिए क़तर पर हमला कर दिया। इस हमले में हमास के कुछ सदस्य मारे गए लेकिन एक कतरी सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई।
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क़तर ने तुरंत इसकी जानकारी अमेरिका को दी। जिसके बाद ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन किया। किताब के मुताबिक फोन पर ट्रंप का गुस्सा साफ नजर आया। उन्होंने नेतन्याहू से कहा, हर कोई तुमसे तंग आ चुका है। बीवी सभी यहूदी भी तुमसे परेशान है। यहां तक कि इस कॉल पर मौजूद दो यहूदी भी तुमसे तंग आ चुके हैं। ट्रंप का इशारा उस समय कॉल पर मौजूद अमेरिकी अधिकारी स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेट कुशनर की ओर था। दावा यह भी किया गया कि इस घटना के बाद ट्रंप नेतन्याहू को वाइट हाउस बुलाया और अपने सामने क़तर के शासक को फोन लगाकर उनसे माफी मंगवाई। किताब के मुताबिक ट्रंप नहीं चाहते थे कि गाजा युद्ध विराम की कोशिशें इज़राइल की सैनिक कार्रवाई की वजह से पटरी से उतर जाए। किताब में एक और बड़ा दावा किया गया। इसमें कहा गया कि ट्रंप ने निजी बातचीत में नेतन्याहू को धोखेबाज तक कहा था। इतना ही नहीं हाल ही में ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष विराम की कोशिशों के दौरान भी ट्रंप कथित तौर पर नेतन्याहू पर भड़क गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने फोन पर कहा था तुम पूरी तरह पागल हो। अगर मैं ना होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूं। लेकिन अब हर कोई तुमसे और इजराइल से नफरत करने लगा है। बाद में ट्रंप ने स्वीकार भी किया कि उन्होंने नेतन्याहू से कड़ी भाषा में बात की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेतन्याहू उनके अच्छे दोस्त हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू पिछले कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों को ईरान पर सैनिक कारवाई के लिए राजी करने की कोशिश करते रहे। लेकिन सबसे ज्यादा समर्थन उन्हें ट्रंप के कार्यकाल में मिला। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। लेकिन जब संघर्ष लंबा खींचने लगा और युद्ध विराम की कोशिशें शुरू हुई तो दोनों नेताओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग दिखने लगी। विश्लेषक कहते हैं कि जहां ट्रंप लंबे युद्ध से बाहर निकलना चाहते थे व नितन्याऊ पर लगातार युद्ध जारी रखने के राजनीतिक दबाव बनाए जाते रहे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी लंबित है और इजराइल की राजनीति में चर्चा रही है कि युद्ध खत्म होने के बाद उन्हें चुनाव और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर किताब में किए गए यह दावे सही साबित होते हैं तो यह साफ है और संकेत भी है कि दुनिया के सबसे चर्चित राजनीतिक गठबंधनों में शामिल ट्रंप और नेतओं के रिश्तों में भी कई बार गंभीर दरारें आए।
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