Belgium: बजट संकट पर Bart De Wever ने दिया इस्तीफा, King Philippe ने फैसला टाला

बेल्जियम में गठबंधन सरकार के भीतर बजट को लेकर सहमति न बन पाने पर प्रधानमंत्री ने अपने पद से त्यागपत्र सौंप दिया है। ब्रसेल्स स्थित रॉयल पैलेस ने बताया कि राजा ने फिलहाल इस इस्तीफे को स्वीकार करने पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। राजा फिलिप अब मंगलवार से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।
ब्रसेल्स, दो नवंबर (एपी) बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने लंबे समय से जारी बजट संकट के गहराने के बीच सोमवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन राजा फिलिप ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि वह उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे या नहीं। रूढ़िवादी फ्लेमिश समुदाय के राष्ट्रवादी नेता डी वेवर ने भारी कर्ज से जूझ रहे बेल्जियम की बजट संबंधी समस्याओं से निपटने के संकल्प के साथ पदभार संभाला था, लेकिन वह अपनी योजनाओं के लिए पांच दलों वाली गठबंधन सरकार के अन्य सदस्यों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रहे। बेल्जियम के रॉयल पैलेस ने पुष्टि की कि डी वेवर ने ‘अपनी सरकार के भीतर बजट वार्ता विफल होने के बाद’ इस्तीफा दे दिया है।
राष्ट्रीय सरकारों के गठन की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले राजा ने इसे स्वीकार करने या नहीं करने के बारे में अभी ‘फैसला नहीं लिया’ है। महल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘‘राजा इस बात पर खेद जताते हैं कि ऐसा कोई समझौता नहीं हो सका, जिससे देश को एक विश्वसनीय बजट मिल पाता और वह मौजूदा चुनौतियों से निपट पाता।’’ यह बयान दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद जारी किया गया। राजा फिलिप मंगलवार से विभिन्न दलों के संसदीय समूहों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे।
इसके बाद वह शुक्रवार को डी वेवर से महल में फिर मुलाकात करेंगे। फरवरी 2025 में पदभार संभालने वाले डी वेवर अब 31 दिसंबर से पहले 2027 के बजट पर समझौता करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बेल्जियम यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में सबसे अधिक कर्ज वाले देशों में से एक है।
फ्रांस और इटली भी इसी श्रेणी में आते हैं। देश पर कर्ज का बोझ कई वर्षों से बढ़ रहा है, लेकिन कोविड महामारी और ऊर्जा संकट ने स्थिति को और खराब कर दिया। यूरोपीय आयोग ने अनुमान जताया है कि इस साल बेल्जियम का कर्ज उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 110 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
इस कर्ज पर बढ़ता ब्याज भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसा उस समय हो रहा है जब सरकार रक्षा खर्च बढ़ाना चाहती है।
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