भारत के Renewable Energy सेक्टर में 67 अरब डॉलर का निवेश, Pralhad Joshi ने दी जानकारी

भारत के Renewable Energy सेक्टर में 67 अरब डॉलर का निवेश, Pralhad Joshi ने दी जानकारी
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केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में बताया कि भारत के स्वच्छ ईंधन क्षेत्र ने पिछले दो वर्षों में भारी पूंजी आकर्षित की है। देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता बढ़कर 310 गीगावाट तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं में भी देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नयी दिल्ली, दो नवंबर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को कहा कि देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो साल में 67 अरब डॉलर का निवेश आया है, जो किसी एक क्षेत्र में हुए सबसे बड़े निवेश में से एक है। जोशी ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा (बीआरई) शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और देश की भविष्य की बिजली मांग पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की गैर-जीवाश्म ईंधन (स्वच्छ ईंधन) आधारित स्थापित ऊर्जा क्षमता 310 गीगावाट हो गई है जो सितंबर, 2024 के 200 गीगावाट से कुछ अधिक थी।

जोशी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता में 110 गीगावाट की वृद्धि हुई है, जो 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने कहा, ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो साल में कुल 67 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। यह किसी एक क्षेत्र में हुए सबसे बड़े निवेश में से एक है।

उन्होंने निवेशकों से भारत में निवेश जारी रखने और देश की विकास गाथा का हिस्सा बनने का आग्रह किया। जोशी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और विभिन्न एजेंसियों ने देश की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को संशोधित कर सात प्रतिशत तक कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने सौर विनिर्माण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है।

जोशी के मुताबिक, देश की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के 2.8 गीगावाट से बढ़कर 171 गीगावाट हो गई है। इसी तरह पवन ऊर्जा क्षमता 21 गीगावाट से बढ़कर 60 गीगावाट, सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता दो गीगावाट से बढ़कर 225 गीगावाट और सौर सेल विनिर्माण क्षमता शून्य से बढ़कर 45 गीगावाट हो गई है। पवन टर्बाइन विनिर्माण क्षमता भी 10 गीगावाट से बढ़कर 24 गीगावाट हो गई है।

उन्होंने कहा कि देश में उपभोक्ताओं को कम दरों पर नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने के मामले में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2014 में सौर ऊर्जा की दर 5.50 रुपये प्रति यूनिट थी, जो घटकर 2.15 रुपये प्रति यूनिट पर आ गई है। वहीं, सौर ऊर्जा और बैटरी से मिलने वाली बिजली की दर आज 2.70 रुपये प्रति यूनिट है।

जोशी ने कहा कि भारत में हरित हाइड्रोजन की सबसे कम कीमत 279 रुपये और हरित अमोनिया की कीमत 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम तय हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों ने हरित हाइड्रोजन की खरीद के लिए करार किए हैं। इन समझौतों के तहत सालाना 5.5 लाख टन से अधिक हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति की जाएगी।

इससे भारत हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति के मामले में दुनिया में अग्रणी बन गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों ने इस साल हरित हाइड्रोजन की चार लाख टन सालाना से अधिक आपूर्ति के लिए 18 समझौते किए हैं। जोशी के मुताबिक, वर्ष 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू होने के बाद से अबतक हरित हाइड्रोजन की करीब 5.5 लाख टन सालाना आपूर्ति के लिए लगभग 23 समझौते किए जा चुके हैं।

इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मात्रा निर्यात के लिए निर्धारित है। उन्होंने कहा कि इन हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं से करीब 90,000 करोड़ रुपये का कुल निवेश आने की उम्मीद है।

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