हम ईरान के लिए...होर्मुज के बाद लाल सागर की बारी, युद्ध में कूदे हूती, दहाड़े याह्या सारी

आज कच्चे तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल के पार जा रही हैं जो आगे आने वाले समय में और ज्यादा बढ़ सकती हैं। लाल सागर स्वेज नहर का प्रवेश द्वार है और अगर यह बंद होता है तो इससे चीन, भारत और दक्षिण पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाला सारा व्यापार ठप हो सकता है। हूतियों की धमकी ने वाशिंगटन और ब्रिसल्स में हड़कंप मचा दिया है।
एक तरफ है होर्मुज जलडमरू मध्य और दूसरी ओर है लाल सागर से होते हुए बाब अलमंडे। एक के तट पर बसा है ईरान तो दूसरे के तट पर यमन। होर्मुज को फिलहाल ईरान ने बंद रखा है और जिसे वह चाहे उसी जहाज को गुजरने दे रहा है। लेकिन अब संकट मंडराने लगे हैं लाल सागर के बंद होने के भी। जी हां, होमस की तरह लाल सागर और बाब अलमंडे भी तेल और दूसरे व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से पूरी दुनिया एक भीषण महायुद्ध और वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट सुन रही है। पिछले कई दिनों से ईरान पर अमेरिका और इसराइल के साझा हमले जारी हैं जिसके जवाब में ईरान ने ना केवल अपनी पूरी सैन्य शक्ति झोंक दी है बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होमस जलडमरू मध्य को भी बंद कर दिया है। इस बीच यमन के होती विद्रोहियों के युद्ध में सीधे कूदने की धमकी ने पूरी दुनिया की सांसे रोक दी है। 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और इसराइल के संयुक्त सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसराइली वायुसेना के स्टील्स विमानों और अमेरिकी नौसेना के मिसाइलों ने तेहरान, इसान और नतंज स्थित ईरान के परमाणु केंद्रों और मिसाइल गोदामों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है। लेकिन दूसरी ओर ईरान ने ऐसी जवाबी कारवाई की है जिससे पूरा मिडिल ईस्ट इस वक्त डर के साए में जी रहा है। ईरान ने इसराइल को तो निशाना बनाया ही लेकिन साथ ही साथ अपने पड़ोसी देश जहां अमेरिका के सैन्य बेस मौजूद हैं उन्हें भी जबरदस्त मिसाइलों से दहला दिया।
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ईरान ने जवाबी कारवाही करते हुए इसराइल के तेल अभी और हाइफा जैसे शहरों पर सैकड़ों हाइपरसोनिक मिसाइलें दागी। साथ ही खारी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी आत्मघाती ड्रोंस ने कहर बरपाया। इस युद्ध में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब यमन के होती विद्रोहियों ने आधिकारिक बयान जारी कर ईरान के समर्थन में मोर्चा खोल दिया। हुतियों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर हमले तुरंत नहीं रोके गए तो वे लाल सागर और रणनीतिक बाब अलमंडेव जलडमरू मध्य को पूरी तरह से बंद कर देंगे। हुतियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे लाल सागर से गुजरने वाले हर उस जहाज को निशाना बनाएंगे जो अमेरिका, इसराइल या उनके समर्थकों से जुड़ा होगा। उनके पास मौजूद आधुनिक ईरानी एंटीशिप मिसाइलें और पानी के नीचे चलने वाले ड्रोंस जिन्हें यूवीस भी कहते हैं इस खतरे को वास्तविक और विनाशकारी बना रहे हैं। दुनिया के लिए सबसे डरावनी स्थिति इन दो समुद्री रास्तों यानी होमस और लाल सागर का एक साथ बंद होना है। होरमोस से दुनिया का लगभग 20% और लाल सागर से 12% तेल गुजरता है। इन रास्तों के बंद होने का मतलब है कि दुनिया का 1/3 तेल बाजार से गायब हो जाएगा।
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आज कच्चे तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल के पार जा रही हैं जो आगे आने वाले समय में और ज्यादा बढ़ सकती हैं। लाल सागर स्वेज नहर का प्रवेश द्वार है और अगर यह बंद होता है तो इससे चीन, भारत और दक्षिण पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाला सारा व्यापार ठप हो सकता है। हूतियों की धमकी ने वाशिंगटन और ब्रिसल्स में हड़कंप मचा दिया है। अगर हूती लाल सागर को ब्लॉक करते हैं तो अमेरिका को यमन में जमीनी कारवाई करनी पड़ सकती है जो एक लंबे और खूनी युद्ध की शुरुआत होगी। दूसरी ओर रूस और चीन ने इस स्थिति के लिए अमेरिका की एक तरफा नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। पश्चिमी एशिया में फिलहाल कूटनीतिक रास्ते बंद नजर आ रहे हैं और सैन्य कारवाही तेज होती जा रही है। अगर होती विद्रोहियों ने अपनी धमकी को अमली जामा पहनाया तो दुनिया को एक ऐसी आर्थिक सुनामी का सामना करना पड़ेगा जिसे संभालना किसी भी देश के लिए मुमकिन नहीं होगा।
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अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया यह सोचकर कि ईरान घुटनों पर आ जाएगा लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा ईरान ने जवाबी कारवाई की और इस कारवाही में जख्म मिल रहे हैं उसके पड़ोसी देशों को वो पड़ोसी देश जो अमेरिका को अपनी एक ढाल समझते थे हाल ही में कतर क़तर के गैस प्लांट पर हुए ईरानी हमलों ने कतर की एलएजी निर्यात क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस हमले के कारण क़तर की 17% एलएजी निर्यात क्षमता तबाह हो गई है। जिससे उत्पादन अगले 5 वर्षों तक ठप रहने की आशंका है। देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी क़तर एनर्जी के सीईओ साद अलकाबी के अनुसार इन हमलों से सालाना लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है।
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