Jio Platforms IPO को SEBI की हरी झंडी, $3.8 Billion के साथ टूटेगा Hyundai India का Record

जियो प्लेटफॉर्म्स को 3.8 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी मिलना भारतीय पूंजी बाजार में एक युगांतरकारी बदलाव का संकेत है, जो हुंडई के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है। यह रणनीतिक कदम न केवल कंपनी के स्वतंत्र मूल्यांकन का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि डिजिटल और एआई सेवाओं में इसके विस्तार को नई वित्तीय मजबूती भी प्रदान करेगा। जियो आईपीओ, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सेबी मंजूरी, भारतीय शेयर बाजार, निवेश।
जियो मंचों के प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम को लेकर शुक्रवार को बड़ी खबर सामने आई है। अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी कंपनी को करीब 3.8 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही देश के शेयर बाजार में होने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बनने की राह खुल गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, जियो मंचों की योजना सार्वजनिक निर्गम के जरिए कुल 27 करोड़ शेयर जारी करने की है। कंपनी की मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो मंचों की करीब 66.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं अमेरिकी कंपनियां मेटा और गूगल भी क्रमशः करीब 9.9 प्रतिशत और 7.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं।
अगर कंपनी निर्गम से 3.8 अरब डॉलर जुटाने में सफल रहती है तो यह वर्ष 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 2.95 अरब डॉलर के सार्वजनिक निर्गम को पीछे छोड़ देगा। इस तरह जियो मंचों का निर्गम भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा बन सकता है।
जियो मंचों की सबसे बड़ी पहचान उसकी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो है। जून के अंत तक रिलायंस जियो के ग्राहकों की संख्या 53.3 करोड़ से अधिक थी। चीन मोबाइल के बाद इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल दूरसंचार कंपनी माना जाता है। हालांकि कंपनी का कारोबार अब केवल मोबाइल सेवाओं तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में जियो ने एआई, क्लाउड आधारित सेवाओं और उद्यमों के लिए नेटवर्क सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है।
प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी की योजना रिलायंस जियो इन्फोकॉम के करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाने की है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी रणनीति निदेशक क्रांति बाथिनी के मुताबिक, जियो के लिए शेयर बाजार में उतरने का यह सही समय है। उनका कहना है कि इस समय सार्वजनिक निर्गम बाजार में गतिविधियां बढ़ी हुई हैं और खुदरा निवेशकों तथा घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से निवेशकों को जियो का मूल्यांकन रिलायंस इंडस्ट्रीज से अलग करके करने का मौका भी मिलेगा।
गौरतलब है कि जियो मंचों ने सार्वजनिक निर्गम के लिए जरूरी प्रारंभिक दस्तावेज जून में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास जमा किए थे। नियामक की मंजूरी ऐसे समय मिली है, जब देश के सार्वजनिक निर्गम बाजार में फिर से तेजी दिखाई दे रही है। एक जुलाई के बाद दो महीने से भी कम समय में दो दर्जन से अधिक कंपनियां सार्वजनिक निर्गम की घोषणा या शुरुआत कर चुकी हैं। यह संख्या वर्ष की पहली छमाही में आए 28 सार्वजनिक निर्गमों के करीब पहुंच चुकी है।
हालांकि कंपनी के कारोबार और ग्राहकों की संख्या में वृद्धि जारी रही, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में जियो मंचों के कर्मचारियों की संख्या करीब 21 प्रतिशत घटकर 27,935 रह गई। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि सार्वजनिक निर्गम के बाद जियो का स्वतंत्र मूल्यांकन कितना होता है और निवेशक कंपनी की दूरसंचार के साथ नई तकनीकी सेवाओं वाली रणनीति को किस तरह देखते हैं।
अन्य न्यूज़














