HDFC Bank के CEO जगदीशन को Board की हरी झंडी, अब RBI की मंजूरी पर टिकी निगाहें

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Ankit Jaiswal । Jun 29 2026 8:15PM

पूर्व अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में राहत मिलने के बाद एचडीएफसी बैंक के निदेशक मंडल ने सीईओ शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। हालांकि, विलय के बाद की चुनौतियों और बैंक के प्रदर्शन को देखते हुए उनकी पुनर्नियुक्ति पर अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ही करेगा।

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक में शीर्ष नेतृत्व को लेकर तस्वीर अब पहले से अधिक साफ होती दिखाई दे रही है। दो स्वतंत्र कानूनी संस्थाओं की जांच में बैंक के पूर्व अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती की ओर से उठाए गए सवालों के समर्थन में कोई ठोस आधार नहीं मिलने के बाद बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल की संभावना मजबूत हो गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार बैंक का निदेशक मंडल जल्द ही उनकी पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

बता दें कि शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल इस वर्ष अक्तूबर में समाप्त हो रहा है। ऐसे में बैंक उनके भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय की तैयारी कर रहा है। हालांकि केवल निदेशक मंडल की मंजूरी पर्याप्त नहीं होगी। उनकी दोबारा नियुक्ति के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी भी जरुरी होगी।

गौरतलब है कि बैंक पूर्व अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद उठे विवाद और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं की जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा था। इसी कारण पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया और नए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के चयन में भी देरी हुई। अब जांच पूरी होने के बाद दोनों प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

बैंक ने 26 जून को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि दो स्वतंत्र कानूनी संस्थाओं ने उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयान की समीक्षा की। जांच के दौरान अतनु चक्रवर्ती के पत्र में उठाए गए आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला। बैंक के अनुसार उपलब्ध रिकॉर्ड और गवाहों के बयान उनके दावों से मेल नहीं खाते थे। इसलिए जांच में उन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।

वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट से शशिधर जगदीशन की स्थिति मजबूत हुई है। मैक्वेरी कैपिटल में वित्तीय सेवा अनुसंधान प्रमुख सुरेश गणपति का कहना है कि कानूनी संस्थाओं की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि निदेशक मंडल ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया। ऐसे में केवल मुख्य कार्यकारी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनका मानना है कि इससे निदेशक मंडल और भारतीय रिजर्व बैंक, दोनों के स्तर पर शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल की संभावना बढ़ी है।

बता दें कि पिछले कुछ महीनों में शशिधर जगदीशन स्वयं भी यह कह चुके हैं कि यदि निदेशक मंडल उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंपना चाहता है तो वह इसके लिए तैयार हैं। हालांकि अंतिम निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक के हाथ में रहेगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक केवल कानूनी जांच ही नहीं, बल्कि पिछले एक वर्ष के दौरान बैंक के समग्र प्रदर्शन और अन्य परिस्थितियों का भी आकलन करेगा।

इस बीच एचडीएफसी बैंक के नए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया भी जारी है। मौजूद जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व उप-गवर्नर राजेश्वर राव उन पांच प्रमुख नामों में शामिल हैं, जिन पर बैंक की नामांकन और पारिश्रमिक समिति विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि निदेशक मंडल इनमें से तीन नाम अंतिम मंजूरी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को भेजेगा।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि शशिधर जगदीशन के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती वर्ष 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड के एचडीएफसी बैंक में विलय के बाद सामने आई। इस विलय के कारण बैंक के ऋण और जमा राशि का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक हो गया, क्योंकि बड़ी मात्रा में आवास ऋण के साथ उधार आधारित देनदारियां भी बैंक के पास आ गई थीं। इस अनुपात को सामान्य स्तर पर लाना अभी भी बैंक के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य बना हुआ है।

आशिका समूह के अनुसंधान प्रमुख आशुतोष मिश्रा का कहना है कि निदेशक मंडल भले ही शशिधर जगदीशन को एक और कार्यकाल देना चाहता हो, लेकिन अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक को करना है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक के पास मजबूत नेतृत्व टीम मौजूद है और वरिष्ठ अधिकारी कैजाद भरूचा भी सक्षम नेतृत्व देने की क्षमता रखते हैं।

कुल मिलाकर कानूनी जांच से शशिधर जगदीशन को बड़ी राहत मिली है। अब सभी की नजर भारतीय रिजर्व बैंक के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक का नेतृत्व अगले तीन वर्षों तक किसके हाथों में रहेगा।

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