Meghalaya में Conrad Sangma सरकार से UDP ने तोड़ा नाता

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

मेघालय में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी ने मंगलवार को एनपीपी नीत मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा की। पार्टी के 11 विधायकों के भाजपा और एनपीपी में शामिल होने के बाद यूडीपी के पास विधानसभा में केवल एक विधायक बचा है। हालांकि, मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की सरकार पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

शिलांग, तीन नवंबर मेघालय में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से मंगलवार को समर्थन वापस ले लिया। यूडीपी के एक वरिष्ठ नेता ने यह जानकारी दी। राज्य में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यूडीपी के पास केवल एक विधायक रह गया है।

हालांकि, इस फैसले का मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यूडीपी के एकमात्र विधायक एवं पार्टी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने 31 अक्टूबर को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यूडीपी का यह फैसला उसके 12 में से 11 विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनपीपी में शामिल होने के कुछ सप्ताह बाद आया है।

ये तीनों दल सत्तारूढ़ ‘मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस’ (एमडीए) का हिस्सा हैं। सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला यूडीपी की केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में उस हालिया राजनीतिक घटनाक्रम की समीक्षा की गई, जिसके बाद 60 सदस्यीय विधानसभा में इस क्षेत्रीय दल के पास केवल एक विधायक रह गया है।

बैठक में लिंगदोह, पार्टी महासचिव टी. चाइन और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। चाइन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘केंद्रीय कार्यकारी समिति ने हमारे एकमात्र विधायक द्वारा गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लिए जाने की सिफारिश की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा जाएगा।’’ यूडीपी के आठ विधायक सितंबर में भाजपा में शामिल हो गए थे, जबकि तीन अन्य विधायकों ने पिछले महीने एनपीपी का दामन थाम लिया था।

विधानसभा अध्यक्ष ने बाद में दोनों विलयों को मान्यता दे दी, जिससे विधानसभा में यूडीपी के विधायकों की संख्या 12 से घटकर एक रह गई। यूडीपी 2018 में एमडीए के गठन के समय से ही गठबंधन का हिस्सा रही है। पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में छह सीट जीती थीं और 2023 में अपनी सीट की संख्या बढ़ाकर 12 कर ली थी।

इसके साथ ही वह राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। मौजूदा संकट की शुरुआत सितंबर 2025 में मंत्रिमंडल में फेरबदल से हुई थी। उस समय पार्टी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने मुख्यमंत्री से यूडीपी के दो वरिष्ठ नेताओं पॉल लिंगदोह और किरमेन शायला को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की थी।

इस कदम से यूडीपी के कुछ नेताओं में नाराजगी पैदा हो गई। यह असंतोष बढ़ता गया और अंततः किरमेन समेत पार्टी के आठ विधायक भाजपा में शामिल हो गए। बाद में पॉल लिंगदोह और दो अन्य विधायक मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली एनपीपी में शामिल हो गए।

पॉल लिंगदोह ने सोमवार को मंत्री पद की शपथ ली। अब 60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीपी के 36 और भाजपा के 10 विधायक हैं।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़