Social Media पर निवेश की सलाह देने वाले 93% Finfluencers अनरजिस्टर्ड, CFA Report ने Investors को किया सावधान

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वित्तीय जानकारी के बढ़ते प्रभाव के बीच अपंजीकृत सलाहकारों पर नियंत्रण और भ्रामक प्रचार पर सख्त नियामक निगरानी की तत्काल आवश्यकता है। रिपोर्ट में सेबी और सोशल मीडिया मंचों के बीच बेहतर समन्वय के साथ विज्ञापन प्रकटीकरण के लिए समान नियमों और आचार संहिता को लागू करने की प्रभावी सिफारिश की गई है।
आज के समय में बड़ी संख्या में लोग निवेश से जुड़ी जानकारी के लिए सामाजिक माध्यमों का सहारा लेते हैं। कई लोग वीडियो और छोटे संदेशों के जरिए शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश विकल्पों पर सलाह देते हैं। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने इस बढ़ते चलन को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे अधिकांश वित्तीय प्रभावक सेबी में पंजीकृत नहीं हैं, फिर भी निवेश संबंधी सलाह लगातार दे रहे हैं।
बता दें कि सीएफए संस्थान की ओर से जारी रिपोर्ट में जनवरी से अक्तूबर 2025 के बीच भारत में सक्रिय 48 वित्तीय प्रभावकों का अध्ययन किया गया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इनमें केवल तीन लोग ही सेबी में पंजीकृत पाए गए, जो कुल संख्या का 6.3 प्रतिशत हैं। वहीं 16 प्रभावकों यानी लगभग एक-तिहाई ने सीधे तौर पर शेयर खरीदने, बेचने या बनाए रखने की सलाह दी। इनमें भी केवल दो लोग सेबी में पंजीकृत थे, जबकि 14 बिना पंजीकरण के निवेश संबंधी सुझाव दे रहे थे। रिपोर्ट का कहना है कि ऐसे मामलों की नियामक स्तर पर आगे जांच की आवश्यकता हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले अध्ययन की तुलना में स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। पहले जहां केवल दो प्रतिशत प्रभावक सेबी में पंजीकृत थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 6.3 प्रतिशत हुई है। हालांकि निवेश संबंधी स्पष्ट सलाह देने वालों का अनुपात अब भी लगभग 33 प्रतिशत बना हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि नियमों और वास्तविक गतिविधियों के बीच का अंतर अभी भी बना हुआ है।
गौरतलब है कि पारदर्शिता के मामले में भी कई कमियां सामने आई हैं। अध्ययन के अनुसार, केवल 62.5 प्रतिशत प्रभावकों ने प्रायोजित सामग्री, संबद्ध प्रचार या संभावित हितों के टकराव की जानकारी साझा की। जबकि 37.5 प्रतिशत ने इस तरह का कोई खुलासा नहीं किया। इसी तरह ब्रांड से जुड़े प्रचार या प्रायोजन की जानकारी भी सभी प्रभावकों ने स्पष्ट रूप से नहीं दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर बार खुलासा न करने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यावसायिक संबंध छिपाया गया है, लेकिन एक समान नियमों की कमी के कारण निवेशकों के लिए सही स्थिति समझना कठिन हो जाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, लगभग 72.9 प्रतिशत प्रभावकों ने निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे शुल्क, कर संबंधी प्रभाव और निवेश अवधि की जानकारी दी। लेकिन एक चौथाई से अधिक प्रभावकों ने इन जरूरी बातों का उल्लेख नहीं किया। इससे छोटे निवेशकों के अधूरी जानकारी के आधार पर निर्णय लेने का खतरा बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग सभी प्रभावक छोटे वीडियो के लिए चित्र साझा करने वाले मंच का उपयोग करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में वीडियो साझा करने वाले मंच पर छोटे और लंबे दोनों प्रकार के वीडियो प्रकाशित करती है। अधिकतर प्रभावक सप्ताह में कई बार सामग्री साझा करते हैं और कई तो रोजाना या एक दिन छोड़कर नए वीडियो जारी करते हैं। इससे निवेशकों तक वित्तीय जानकारी लगातार पहुंच रही है।
सीएफए संस्थान ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। रिपोर्ट में निवेश संबंधी खुलासे के लिए एक समान नियम लागू करने, वित्तीय प्रभावकों के लिए अलग आचार संहिता बनाने, सेबी और सामाजिक माध्यम मंचों के बीच बेहतर सहयोग बढ़ाने तथा पंजीकृत और अपंजीकृत सलाह देने वालों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा बिना नियामक पंजीकरण के निवेश सलाह देने वाले खातों की पहुंच और कमाई सीमित करने, एआई से तैयार वित्तीय सामग्री तथा भ्रामक प्रचार पर कड़ी निगरानी रखने की भी जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट का मानना है कि इन कदमों से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और वित्तीय बाजार में पारदर्शिता तथा जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
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