FIFA की Business Strategy पर भारी विवाद, World Cup Boycott की चेतावनी के साथ UEFA का कड़ा रुख

फीफा की फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज योजना के तहत बाहरी निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव ने यूईएफए के साथ एक बड़ा विवाद पैदा कर दिया है जो विश्व कप बहिष्कार तक पहुंच सकता है। 20 अरब डॉलर के मूल्यांकन वाली इस योजना का उद्देश्य खेल के व्यावसायिक अधिकारों का निजीकरण करना है जिसका यूईएफए फुटबॉल की पारदर्शिता और संप्रभुता के आधार पर कड़ा विरोध कर रहा है। कीवर्ड: फीफा, यूईएफए, फुटबॉल विश्व कप बहिष्कार, फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज, जियानी इन्फैन्टिनो।
विश्व फुटबॉल में एक नया विवाद तेजी से गहराता दिखाई दे रहा है। फीफा की नई व्यावसायिक योजना को लेकर यूरोपीय फुटबॉल महासंघ यूईएफए और उसके सदस्य देशों ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यूईएफए इस सप्ताह अपने 55 सदस्य फुटबॉल संघों की आपात बैठक बुलाने की तैयारी कर रहा है। इस बैठक में फीफा के खिलाफ कई विकल्पों पर चर्चा हो सकती है, जिनमें भविष्य के विश्व कप के संभावित बहिष्कार का मुद्दा भी शामिल बताया जा रहा है।
बता दें कि विवाद की वजह फीफा की वह योजना है, जिसके तहत वह अपनी नई इकाई "फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज" में अल्पांश हिस्सेदारी बाहरी निवेशकों को बेचने पर विचार कर रहा है। इस नई इकाई के पास पुरुष और महिला विश्व कप सहित फीफा की प्रमुख प्रतियोगिताओं के व्यावसायिक और आयोजन संबंधी अधिकार होंगे। रिपोर्टों के अनुसार, फीफा इस योजना के जरिए लगभग 4.2 अरब डॉलर जुटाना चाहता है और इस इकाई का प्रारंभिक मूल्यांकन 20 अरब डॉलर रखा गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस योजना पर काम करने के लिए फीफा ने वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी जे. पी. मॉर्गन की सेवाएं ली हैं। संभावित निवेशकों में जोशुआ कुशनर की निवेश कंपनी "थ्राइव इटरनल" का नाम भी सामने आया है। जोशुआ कुशनर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर के भाई हैं।
फीफा की इस योजना पर यूईएफए ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यूईएफए का कहना है कि यह प्रस्ताव ऐसी सीमा पार करता है जिसे फुटबॉल की सर्वोच्च संस्थाओं को कभी पार नहीं करना चाहिए। संगठन का मानना है कि फुटबॉल की आत्मा, उसका संचालन और उसकी पारदर्शिता किसी व्यावसायिक सौदे का हिस्सा नहीं बन सकती। यूईएफए ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फुटबॉल किसी एक संस्था की निजी संपत्ति नहीं है और इसे बेचा नहीं जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2021 में भी यूईएफए और यूरोपीय देशों ने विश्व कप को हर दो वर्ष में आयोजित करने के फीफा के प्रस्ताव का विरोध किया था। उस समय विश्व कप के बहिष्कार की चेतावनी के बाद फीफा को अपना प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था। अब एक बार फिर उसी तरह की रणनीति अपनाने की संभावना जताई जा रही है।
उधर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने भी इस योजना की आलोचना करते हुए कहा कि फुटबॉल निवेशकों की संपत्ति नहीं है। दूसरी ओर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने इस प्रस्ताव का बचाव किया है। उनका कहना है कि इस योजना का उद्देश्य फुटबॉल की व्यावसायिक क्षमता को बढ़ाना और उससे होने वाली आय को दुनिया भर के सदस्य देशों तक पहुंचाना है। उनके अनुसार इससे वैश्विक स्तर पर फुटबॉल के विकास को नई गति मिलेगी।
फीफा ने अपने 211 सदस्य देशों को इस योजना के समर्थन के लिए अधिक आर्थिक सहायता का भी प्रस्ताव दिया है। योजना के अनुसार वर्ष 2031 से 2034 के व्यावसायिक चक्र में प्रत्येक सदस्य संघ को 2 करोड़ डॉलर तक की सहायता मिल सकती है। इसके बाद अगले दो चक्रों में यह राशि क्रमशः 2.2 करोड़ डॉलर और 2.4 करोड़ डॉलर तक बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान व्यवस्था में वर्ष 2027 से 2030 के बीच प्रत्येक सदस्य संघ को 80 लाख डॉलर मिलने का प्रावधान है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, फीफा का कहना है कि नई इकाई बनने के बाद भी प्रतियोगिताओं, खेल के नियमों, अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर और प्रशासनिक फैसलों पर उसका पूरा नियंत्रण बना रहेगा। साथ ही सदस्य देशों को यह स्वतंत्रता भी दी जाएगी कि वे इस नई वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं।
फिलहाल इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। हालांकि फीफा की अगली ऑनलाइन कांग्रेस 23 नवंबर को प्रस्तावित है, जिसमें 2031 और 2035 महिला विश्व कप की मेजबानी पर फैसला भी लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में फीफा और यूईएफए के बीच यह टकराव विश्व फुटबॉल की दिशा तय करने वाला बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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