Youth Olympics में पदक जीतकर इतिहास रचने वाले Thirthank Pegu की नजरें सीनियर वर्ग पर

डकार में कांस्य पदक हासिल कर युवा ओलंपिक में इतिहास रचने वाले पहले भारतीय पुरुष तैराक तीर्थंक पेगू ने अब सीनियर वर्ग में सफलता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में दो मिनट 1.25 सेकेंड के समय के साथ यह पदक अपने नाम किया। कोच संदीप सेजवाल के मार्गदर्शन में मिली इस उपलब्धि को पेगू 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की दिशा में एक अहम पड़ाव मानते हैं।
नयी दिल्ली, आठ नवंबर युवा ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष तैराक तीर्थंक पेगू अब जूनियर स्तर की सफलता को सीनियर वर्ग में भी दोहराना चाहते हैं। उन्होंने डकार में कांस्य पदक जीतने के बाद सीनियर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन को अपना अगला लक्ष्य बताया। पेगू ने पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में दो मिनट 1.25 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता।
इसके साथ ही वह युवा ओलंपिक में पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष तैराक बन गए। रविवार को स्वदेश लौटने के बाद पेगू ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरा सपना था कि मैं विश्व स्तर पर जूनियर वर्ग में पदक जीतूं। मैं वास्तव में आभारी हूं कि मैं इसे हासिल कर सका।
अब मेरा जूनियर करियर खत्म हो गया है और मैं सीनियर वर्ग में भी अच्छा प्रदर्शन करने की योजना बना रहा हूं।’’ इस तैराक ने स्वीकार किया कि फाइनल से पहले वह थोड़ा घबराए हुए थे लेकिन अपने कोच संदीप के साथ बनाई गई रणनीति ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ रेस में उतरने में मदद की। उन्होंने कहा, ‘‘मैं थोड़ा घबराया हुआ था और मेरा आत्मविश्वास भी कुछ कम था लेकिन संदीप सर ने जब मुझे रणनीति समझाई तो मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। मैं केवल उसी योजना को लागू करने पर ध्यान दे रहा था और कुछ नहीं।’’ पेगू ने कहा कि इस प्रतियोगिता के लिए पूरे साल की गई तैयारी के बाद यह पदक उनके और उनकी टीम के लिए बेहद मायने रखता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस प्रतियोगिता के लिए पूरे साल मेहनत की थी इसलिए यह पदक मेरे लिए बहुत मायने रखता है।’’ पेगू के कोच संदीप सेजवाल के मुताबिक यह कांस्य पदक दो साल की तैयारी का नतीजा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि तैराक के लिए 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी। एशियाई खेलों के पूर्व पदक विजेता सेजवाल ने कहा, ‘‘कोई विशेष रणनीति नहीं थी।
हम पिछले दो साल से इस प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे थे। जब हमने पदक जीता तो काफी राहत महसूस हुई क्योंकि हमारी दो साल की मेहनत आखिरकार रंग लाई।’’
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