खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने Doping रोकने के लिए NDTL की नई रिसर्च ग्रांट नीति शुरू की

Mansukh Mandaviya
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Nov 3 2026 10:00PM

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला की नई शोध अनुदान नीति शुरू की है। इसका उद्देश्य प्रतिबंधित दवाओं का पता लगाने और डोपिंग रोकने के लिए वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना है। भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी के बीच खिलाड़ियों को जागरूक करने पर भी जोर दे रहा है।

खेलों में बेहतर प्रदर्शन के साथ खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल से बचाना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय डोप परीक्षण लैब (एनडीटीएल) की नई शोध अनुदान नीति शुरू की। इसका उद्देश्य खेलों में प्रतिबंधित पदार्थों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए नई तकनीक विकसित करना तथा वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना है।

यह घोषणा 10वीं विश्व डोपिंग रोधी वैज्ञानिक संघ (डब्ल्यूएएडीएस) की गुणवत्ता आश्वासन प्रबंधकों की बैठक 2026 के दौरान की गई। 2 नवंबर से शुरू हुई यह 2 दिवसीय बैठक राष्ट्रीय डोप परीक्षण लैब की ओर से आयोजित की गई थी। इसमें खेल और विज्ञान जगत से जुड़े देश-विदेश के विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर खेल मंत्री ने एनडीटीएल के समाचार पत्र का भी शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत में डोपिंग को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देश चाहता है कि खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा, मेहनत और अनुशासन के आधार पर जीत मिले, न कि प्रतिबंधित दवाओं के सहारे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 2 वर्षों के दौरान खेलों को देश के विकास और निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। भारत की खेल यात्रा अब एक नए दौर में पहुंच रही है।

नई शोध अनुदान नीति के बारे में उन्होंने बताया कि इसके जरिए प्रतिबंधित पदार्थों की पहचान करने और उनके इस्तेमाल को रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा। इससे डोपिंग के खिलाफ भारत की वैज्ञानिक तैयारी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि केवल खिलाड़ियों की जांच करना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सही जानकारी देना और डोपिंग के खतरों के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है।

गौरतलब है कि भारत को 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करनी है। इसके अलावा देश 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने की भी तैयारी कर रहा है। ऐसे बड़े आयोजनों को देखते हुए खेलों में पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। मांडविया ने कहा कि खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और चिकित्सा से जुड़े लोगों को प्रतिबंधित पदार्थों, कुछ पूरक आहारों से होने वाले नुकसान और डोपिंग रोधी नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

खेल मंत्री ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए चल रही योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया, फिट इंडिया और लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना जैसी पहलों से देश में खेलों का माहौल मजबूत हुआ है। इन योजनाओं के जरिए युवाओं को आगे बढ़ने के ज्यादा मौके मिल रहे हैं।

उन्होंने 2026 के एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि देश पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा, जो भारत के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है। वहीं, एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड 114 पदक जीतकर नया इतिहास बनाया है।

इस 2 दिवसीय बैठक में खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव, विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के वरिष्ठ सहयोगी निदेशक (प्रयोगशाला विज्ञान एवं चिकित्सा) ओस्केल बारोसो, डब्ल्यूएएडीएस की अध्यक्ष डोरोटा क्वियातकोव्स्का और एनडीटीएल के निदेशक प्रोफेसर पी.एल. साहू सहित कई वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे हैं।

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