क्लाउड सेवा बाजार में प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों पर रोक के लिए कदम उठाने की जरूरत: कट्स रिपोर्ट

कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (कट्स इंटरनेशनल) ने सरकार और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से क्लाउड सेवा बाजार में प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने का आग्रह किया है। रिपोर्ट में सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग की गहन जांच और बाजार अध्ययन कराने की सिफारिश की गई है। कट्स के महासचिव प्रदीप एस. मेहता ने अत्यधिक नियमन से बचते हुए नवोन्मेष और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
नयी दिल्ली, 29 जुलाई सरकार और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को तेजी से बढ़ रहे क्लाउड सेवा बाजार में संभावित प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। कट्स इंटरनेशनल की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया। कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (कट्स इंटरनेशनल) की दो रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा आयोग क्लाउड सेवा प्रदाताओं से जुड़ी सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग गतिविधियो की गहन जांच शुरू करने पर विचार कर सकता है।
रिपोर्ट में सीसीआई से भारत में क्लाउड सेवाओं के लिए एक बाजार अध्ययन कराने की सिफारिश की गई है। इसके माध्यम से बाजार की संरचना और कारोबारी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी, जहां प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए हस्तक्षेप की जरूरत हो सकती है। क्लाउड सेवाएं इंटरनेट के माध्यम से तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली आईटी सेवाएं हैं।
इनके जरिये कंपनियां और उपभोक्ता बिना भौतिक हार्डवेयर खरीदे जरूरत के अनुसार सर्वर, स्टोरेज और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं। कट्स इंटरनेशनल के अध्ययन में सरकार या भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को उद्योग के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की सिफारिश की गई है, ताकि क्लाउड सेवा प्रदाताओं को ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा एवं बाजार प्राधिकरण के समक्ष की गई अपनी स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं को भारतीय बाजार में भी लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इनमें डेटा बाहर ले जाने के शुल्क को माफ करना और विभिन्न क्लाउड प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया कि क्लाउड सेवा बाजार में सामने आने वाली अधिकांश प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं का समाधान प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत किया जा सकता है। साथ ही, तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी विचार किया जा सकता है। कट्स इंटरनेशनल के महासचिव प्रदीप एस. मेहता ने कहा कि क्लाउड सेवाएं भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी हस्तक्षेप को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए जिससे अत्यधिक नियमन से बचते हुए नवोन्मेष, प्रतिस्पर्धा और वृद्धि को बढ़ावा मिले।’’ दोनों रिपोर्ट में बाजार की निरंतर निगरानी, समय-समय पर प्रतिस्पर्धा आकलन, विभिन्न प्रौद्योगिकी प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल और आसान डेटा हस्तांतरण की सुविधा और प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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