Khelo India खेल उपकरण विनिर्माण योजना को Cabinet ने दी 1856 करोड़ रुपये की मंजूरी

Khelo India खेल उपकरण विनिर्माण योजना को Cabinet ने दी 1856 करोड़ रुपये की मंजूरी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेल सामग्री के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना को स्वीकृति दी है। वर्ष 2026 से 2033-34 तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट पर 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मकसद भारत को खेल उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत केंद्र बनाना और युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘खेलो इंडिया खेल उपकरण विनिर्माण योजना’ को मंजूरी दे दी जिसका उद्देश्य खेल उपकरणों के वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना और देश में खेल सामग्री के विनिर्माण को बढ़ावा देना है। वर्ष 2026 से 2033-34 तक की अवधि के लिए इस योजना पर कुल 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस योजना के तहत अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विस्तार के जरिए भारत के खेल उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती दी जाएगी।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘यह योजना वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेल उपकरण उद्योग के विकास में मदद करेगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति मजबूत करेगी।’’ केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इस योजना से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। मांडविया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “भारत खेलेगा, भारत बनाएगा! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 1,856.67 करोड़ रुपये के बजट वाली ‘खेलो इंडिया खेल उपकरण विनिर्माण योजना’ को मंजूरी दी।

बजट 2026-27 की घोषणा अब धरातल पर उतर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अब केवल भारतीय खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि भारत में बने खेल उपकरण भी दुनियाभर में तिरंगे का गौरव बढ़ाएंगे। यह पहल रोजगार के नये अवसर पैदा करने, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगी।’’ योजना के तहत समर्पित खेल उपकरण विनिर्माण क्षेत्र (एसजीएमजेड) विकसित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य क्षेत्र आधारित उत्पादन को बढ़ावा देना और एकीकृत औद्योगिक तंत्र तैयार करना है।

इन क्षेत्रों में विनिर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण सुविधाओं, डिजाइन एवं प्रोटोटाइप केंद्रों तथा सहायक उद्यमों को एक ही स्थान पर विकसित करने की परिकल्पना है। पीआईबी के अनुसार, ‘‘इन क्षेत्रों को भाव्या योजना और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) के औद्योगिक पार्कों के मौजूदा बुनियादी ढांचे के साथ समन्वय स्थापित करके विकसित किया जाएगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल और खेल उपकरणों की पूरी मूल्य शृंखला की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिलेगी।

योजना का प्रमुख उद्देश्य खेल उपकरण क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित करना और देश की घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार करना है। इसके तहत कारोबार से जुड़े प्रोत्साहनों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, विनिर्माण क्षमता के विस्तार और निरंतर विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन पहलों के लिए संयुक्त रूप से 1,130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इससे घरेलू उत्पादन मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने, देश में उत्पादों के मूल्यवर्धन को बढ़ाने, निजी निवेश आकर्षित करने और पूरी मूल्य शृंखला में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही वैश्विक बाजार में भारतीय खेल उपकरणों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी। खेल उपकरण क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका को ध्यान में रखते हुए मौजूदा विनिर्माण क्लस्टरों के उन्नयन के लिए भी सहायता दी जाएगी।

इसके तहत साझा सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा, ताकि छोटे विनिर्माताओं को बेहतर उत्पादन सुविधाएं मिल सकें। विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और प्रमाणपत्रों के नवीनीकरण के लिए भी विनिर्माताओं को सहायता दी जाएगी। इसके लिए 105 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।’’ खेल उपकरणों के क्षेत्र में अनुसंधान, डिजाइन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने में सहायता दी जाएगी।

इन केंद्रों में खेल उपकरणों, पदार्थ विज्ञान, सुरक्षा उपकरणों और उन्नत विनिर्माण तकनीकों पर अनुसंधान किया जाएगा। इसके अलावा, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के साथ समन्वय के जरिए प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना का व्यापक लक्ष्य भारत को खेल उपकरणों के उत्पादन, तकनीकी विकास और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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