Tipu Sultan Death Anniversary: भारत के पहले 'Rocket Man' थे टीपू सुल्तान, जिनके फौलादी रॉकेट से कांपती थी British सेना

आज ही के दिन यानी की 04 मई को 'मैसूर के राजा' टीपू सुल्तान का निधन हो गया था। टीपू सुल्तान हमेशा अपने निडरता और बहादुरी के लिए जाने जाते थे। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का पुरजोर विरोध किया था।
सुल्तान फतेह अली खान साहब यानी कि टीपू सुल्तान का 04 मई को निधन हो गया था। उनको भारत के पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है। टीपू सुल्तान हमेशा अपने निडरता और बहादुरी के लिए जाने जाते थे। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का पुरजोर विरोध किया था। वह मैसूर के राजा थे, इस कारण टीपू सुल्तान को 'मैसूर का टाइगर' कहा जाता था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर टीपू सुल्तान के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
कर्नाटक के देवनहल्ली शहर में 20 नवंबर 1750 को टीपू सुल्तान का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम हैदर अली और मां का नाम फातिमा फखरू निशा था। टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली दक्षिण भारत में मैसूर के साम्राज्य के एक सैन्य अफसर थे।
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रॉकेट का आविष्कार
टीपू सुल्तान ने अपने शासनकाल में सबसे पहले बांस से बने रॉकेट का आविष्कार किया था। बांस से बने यह रॉकेट हवा में करीब 200 मीटर की दूरी तय कर सकते हैं। वहीं इन रॉकेट को उड़ाने के लिए 250 ग्राम बारूद का इस्तेमाल किया जाता था। बांस के रॉकेट के बाद उन्होंने लोहे का इस्तेमाल करके रॉकेट बनाना शुरूकर दिया। बांस के मुकाबले यह रॉकेट ज्यादा दूरी तय करते थे। लेकिन इनमें बारूद का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता था। यह रॉकेट विरोधियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाते थे।
रॉकेट का इस्तेमाल
अपने शासनकाल में टीपू सुल्तान ने कई तरह के प्रयोग किए थे। इस बदलाव की वजह से उनको एक अलग राजा की उपाधि प्राप्त है। टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली के पास भी 50 से ज्यादा रॉकेटमैन थे। जिसका वह अपने सेना में बखूबी इस्तेमाल करते थे। इनको रॉकेटमैन इसलिए भी कहा जाता था, क्योंकि वह रॉकेट चलाने में माहिर थे। टीपू सुल्तान युद्ध के दौरान विरोधियों पर ऐसे निशाने लगाते थे, जिससे विरोधियों को काफी ज्यादा नुकसान होता था। पहली बार टीपू सुल्तान के शासनकाल में लोहे के केस वाली मिसाइल रॉकेट बनाई गई थी।
टीपू सुल्तान की मौत
चौथे एंग्लो-मैसूर युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शाही बलों को हैदराबाद और मराठों के निजामों ने अपना समर्थन दिया था। इसके बाद वह टीपू सुल्तान को हरा सके थे। वहीं 04 मई 1799 को श्रीरंगापटना में टीपू सुल्तान की हत्या कर दी गई थी।
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