10 रुपए का नोट...क्या इस कथित स्कैम की वजह से चुनाव हार जाएंगी ममता बनर्जी? बंगाल में कैसे BJP ने खेला कर दिया

अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हो जाता है 4 तारीख का ये जो एग्जिट पोल है अगर यह 4 तारीख को नतीजों में बदल जाता है तो वाकई में इस बार बंगाल में परिवर्तन होगा कमल खिलेगा ममता की कुर्सी हिल सकती है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो बंगाल में इस बार अगर कोई बड़ा उलटफेर हुआ तो उसके पीछे कोयला घोटाला भी एक बड़ी वजह होगा।
पश्चिम बंगाल में मतदान संपन्न हो चुके हैं। अब इंतजार है तो सिर्फ 4 मई का जब नतीजे आएंगे और क्लियर हो जाएगा कि सत्ता में ममता बनर्जी की वापसी होगी या फिर इस बार पश्चिम बंगाल में कमल खिलेगा। लेकिन उससे पहले जो एग्जिट पोल सामने आए हैं, वह कहीं ना कहीं ममता बनर्जी की जमीन हिला रहे हैं। तमाम टीएमसी नेताओं की धड़कनें बढ़ा रहे हैं। और कुछ नेता तो क्या कह रहे हैं टीएमसी के? टीएमसी के नेता कह रहे हैं कि बीजेपी हर बार इस तरीके का माहौल बनाती है और उसका माहौल उल्टा ही साबित होता है। इस बार जो बंगाल में 200 पार का यह लोग बातें कर रहे हैं। इस बार वो बातें हवा-हवाई ही साबित होंगी क्योंकि 4 मई को जो नतीजे आएंगे वो टीएमसी के पक्ष में आएंगे। हालांकि बीजेपी वाले जो हैं वो ये कह रहे हैं कि इस बार ममता बनर्जी के साथ खेला होगा। इस बार बंगाल परिवर्तन चाहता है और इस बार बंगाल में परिवर्तन होगा। देखिए इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब बंगाल में बिना किसी हिंसा के बिना किसी मौत के चुनाव संपन्न हुए। क्योंकि हर बार आप देखते थे चुनाव होते थे। जगह-जगह आगजनी की खबरें, हिंसा की खबरें, बूथ लूटने की खबरें सामने आती थी। कई लोगों की मौत तक की खबरें सामने आती थी। लेकिन इस बार जहां बवाल करने की कोशिश की वहां केंद्रीय बलों ने अच्छे से हिसाब किताब कर दिया और उसका नतीजा क्या हुआ? ऐतिहासिक जो मतदान प्रतिशत सामने आया वह रहा है। पिछले चुनाव में 92 से ऊपर रहा और इस बार 91 से ज्यादा मतदान प्रतिशत रहा है। अब एग्जिट पोल का भी जिक्र कर लेते हैं क्योंकि इस बार जो चुनाव के बाद बंगाल के एग्जिट पोल आ रहे हैं वो कहीं ना कहीं बीजेपी की आंधी में ममता बनर्जी को उड़ा रहे हैं। पोल ऑफ एग्जिट पोल्स की जिसमें टीएमसी को 147 सीटें दिखाई गई हैं। जबकि बीजेपी टक्कर देती यहां नजर आ रही है। 137 सीटें बीजेपी को दिखाई गई हैं। वहीं कांग्रेस की बात कर लें तो कांग्रेस सिर्फ दो पर सिमटती नजर आ रही है। चाणक्य का सर्वे भी ममता बनर्जी की धड़कनें बढ़ा रहा है। इस बार चाणक्य के सर्वे में टीएमसी को 130 से 140 सीटें दिखाई गई हैं। बीजेपी को 150 से 160 सीटें दिखाई गई हैं। अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हो जाता है 4 तारीख का ये जो एग्जिट पोल है अगर यह 4 तारीख को नतीजों में बदल जाता है तो वाकई में इस बार बंगाल में परिवर्तन होगा कमल खिलेगा ममता की कुर्सी हिल सकती है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो बंगाल में इस बार अगर कोई बड़ा उलटफेर हुआ तो उसके पीछे कोयला घोटाला भी एक बड़ी वजह होगा। दरअसल, यही वो घोटाला था जिसकी पहली एफआईआर तो दर्ज हुई कुछ चुनिंदा लोगों पर। लेकिन 6 साल बाद वो जांच पहुंची एक ऐसी कंपनी के दरवाजे तक जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की चुनावी रणनीतिकार है। बात कर रहे हैं पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म आईपैक की जिसके कर्ताधर्ता कभी खुद प्रशांत किशोर हुआ करते थे। जिसे चलाने वाला एक शख्स फिलहाल जेल में है और बाकी दो भी खुद को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं जिन पर जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर इस बार बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर हुआ तो इसकी एक वजह यह कोयला घोटाला भी होगा जिसके चलते आईपैक चारों तरफ से घिरी हुई है। ममता बनर्जी के लिए आईपैक की क्या अहमियत है? इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब आईपेक के दफ्तर पर ईडी का छापा पड़ा तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद आईपैक के दफ्तर पहुंच गई थी।
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650 करोड़ के घोटाले को फिल्मी तरीके से दिया गया अंजाम
27 नवंबर 2020 की तारीख थी और शाम के करीब 7:00 बज रहे थे। उस वक्त देश की जांच एजेंसी सीबीआई अपने कोलकाता ऑफिस में एक एफआईआर दर्ज कर रही थी। यह एफआईआर थी पश्चिम बंगाल की कोयला कंपनी से जुड़े एक खनन घोटाले को लेकर। शुरुआत में इस एफआईआर में उस कोयला कंपनी के एंप्लाइज, कुछ सुरक्षा अधिकारियों और सीआरपीएफ से लेकर रेलवे से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया था। तब यह मामला एक नॉर्मल घोटाले जैसा लग रहा था। लेकिन यह मामला गंभीर तब हुआ जब इसमें इनफोर्समेंट डायरेट की भी एंट्री हो गई और उसके बाद जो खुलासा हुआ उसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सबको चौंका दिया। क्योंकि सीबीआई और ईडी ने यह दावा किया कि यह घोटाला कोई 10 20 करोड़ का नहीं था। यह घोटाला था पूरे ₹650 करोड़ का। इस घोटाले को पूरे फिल्मी तरीके से अंजाम दिया गया था और उगाही का एक ऐसा खुफिया नेटवर्क बनाया गया था जिसमें 10 से ₹20 के नोटों का इस्तेमाल एक कोडेड मैसेज की तरह किया जाता था और अवैध रूप से खुदाई किए गए कोयले को ऐसी कंपनियों के नाम पर भेजा जाता था जिनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं था| इस पूरे घोटाले में इकट्ठा किए गए पैसे को गुंडा टैक्स कहा गया जिसके पीछे मास्टरमाइंड था अनूप मांझी उर्फ लाला। जांच एजेंसियों ने इल्जाम लगाए कि इसी घोटाले के पैसे से इस पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म को उसकी फीस अदा की गई और पैसा इसी एजेंसी के जरिए ब्लैक से व्हाइट किया गया।
केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर ममता सरकार
प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद से 'आई-पैक' (I-PAC) की पूरी कमान प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंदेल के हाथों में है। आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र और मल्टीनेशनल कंपनी 'डेलॉयट' में एनालिस्ट रहे प्रतीक जैन 2015 में आई-पैक के को-फाउंडर बने थे। पीके के जाने के बाद उन्होंने ही मीडिया की नजरों से दूर रहकर ममता बनर्जी की पार्टी व सरकार के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी संभाली। इस बीच, ममता सरकार के तीसरे कार्यकाल में शिक्षक भर्ती, मवेशी तस्करी और कोयला घोटाले जैसे भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले उजागर हुए, जिससे पूरी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई। जांच की यह आंच आई-पैक तक भी पहुंच गई है, क्योंकि एजेंसियों को गहरा शक है कि तृणमूल कांग्रेस के चुनावी अभियानों का प्रबंधन करने के लिए आई-पैक को जो भारी-भरकम रकम दी गई थी, वह वास्तव में कोयला घोटाले से कमाया गया अवैध धन ही है।
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लाला पैड का फर्जी चालान सिस्टम
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अनूप मांझी (उर्फ लाला) ने अवैध कोयला तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क चलाने के लिए 'लाला पैड' नामक फर्जी चालान सिस्टम तैयार किया था। अवैध कोयले से भरे ट्रकों को चेक पोस्ट से सुरक्षित निकालने के लिए ₹10 या ₹20 के नोट का इस्तेमाल 'पासवर्ड' की तरह होता था। नोट का सीरियल नंबर और ट्रक की फोटो व्हाट्सएप के जरिए भ्रष्ट अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी, जिससे ट्रक बिना जांच के पास हो जाते थे। जांच एजेंसियों (ED) के मुताबिक, बंगाल की कुछ कंपनियों को अवैध कोयला बेचकर करीब ₹650 करोड़ की नकदी जुटाई गई। इस काले धन को हवाला ऑपरेटरों के जरिए सफेद धन (White Money) में बदला गया और फिर कथित तौर पर आई-पैक (I-PAC) के माध्यम से इसका इस्तेमाल चुनावी प्रबंधन में किया गया।
ईडी की कार्रवाई
इसी मामले की जांच और पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) का पता लगाने के लिए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने 8 जनवरी 2026 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित आई-पैक के दफ्तर पर छापेमारी की थी। ममता बनर्जी का सीधा दखल नहीं हुआ। ममता बनर्जी के दखल के साथ ही यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक रंग भी लेने लगा। जिसने भाजपा और टीएमसी को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया।
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