UP Outsourced Employees: Yogi Govt की नई व्यवस्था, बिचौलियों की मनमानी होगी खत्म! जानें फायदे और चुनौतिया

Yogi Adityanath
ANI
Priyanka । Sep 7 2026 6:28PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यूपीसीओएस पोर्टल लॉन्च किया है। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और पारदर्शी भर्ती, समय पर वेतन व सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित होंगे। इससे राज्य के लगभग 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर को 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स्ड सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन' (UPCOS) पोर्टल और वेबसाइट लॉन्च की। यह राज्य-स्तरीय, गैर-लाभकारी संगठन है जिसे आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों के अधिकारों को विनियमित करने और उनकी सुरक्षा के लिए बनाया गया है। योगी आदित्यनाथ ने UPCOS लॉन्च करते हुए कहा कि सिस्टम में बिचौलियों की कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों को फ़ायदा होगा और उनके हितों की रक्षा होगी। मुख्यमंत्री ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के साथ UPCOS पोर्टल और वेबसाइट लॉन्च की और इसका लोगो भी जारी किया।

UPCOS का उदेश्य

राज्य कैबिनेट ने पिछले साल सितंबर में आउटसोर्सिंग सिस्टम को "व्यवस्थित" करने के लिए इस कॉर्पोरेशन के गठन को मंज़ूरी दी थी। आदित्यनाथ ने कहा कि इस कॉर्पोरेशन से आउटसोर्स कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों समेत 17-20 लाख लोगों को फ़ायदा होगा। UPCOS का मकसद पारदर्शी तरीके से भर्ती करना, समय पर सीधे सैलरी का भुगतान सुनिश्चित करना और एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) व एम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस (ESI) जैसे सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स देना है। योगी ने बताया कि अब से सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां ​​और कर्मचारी एक पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम से जुड़ेंगे, जिससे मैनपावर की ज़रूरत का आकलन किया जा सकेगा और उसी के अनुसार ह्यूमन रिसोर्स प्लानिंग की जा सकेगी।

क्या होगा फायदा

मुख्यमंत्री के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी, जो योग्यता और मेरिट पर आधारित होगी और राज्य सरकार की आरक्षण नीतियों के अनुसार होगी। भर्ती, पोस्टिंग, हाज़िरी, वेतन, ग्रेच्युटी, इंश्योरेंस और सर्विस से जुड़े फ़ायदों की डिजिटल निगरानी भी की जाएगी। अब कर्मचारी अपनी सर्विस से जुड़ी जानकारी, अकाउंट, हाज़िरी, पेमेंट और कटौती वगैरह एक ही जगह पर देख सकेंगे। वे पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे और उसका समय पर समाधान पा सकेंगे। हर कर्मचारी के लिए उनकी कैटेगरी और शैक्षणिक योग्यता के हिसाब से वेतन भी सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार ESI अस्पतालों में मुफ़्त इलाज के लिए ESI योगदान देगी। अगर वहाँ इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, तो उसे आयुष्मान भारत से जोड़ा जाएगा। इससे आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी मिलेगा। मैटरनिटी लीव समेत सर्विस से जुड़े सभी ज़रूरी फ़ायदे भी सुनिश्चित किए जाएँगे।

सामाजिक सुरक्षा

- दुर्घटना बीमा कवर: 20-40 लाख।

- आग लगने की घटना: 10 लाख।

- आपातकालीन दवाएं: 5 लाख।

- एयर एम्बुलेंस सुविधा: 10 लाख।

- बेटे की शिक्षा: 8 लाख तक।

- बेटी की शिक्षा: 10 लाख तक।

- दो बेटियों की शादी: 8-10 लाख तक।

- कर्मचारी की मृत्यु: परिवार को 50,000 का तत्काल भुगतान।

- मातृत्व अवकाश समेत वैधानिक सेवा लाभ।

- भर्ती, उपस्थिति और भुगतान की डिजिटल मॉनिटरिंग।ष

- ऑनलाइन शिकायत और सेवा रिकॉर्ड की सुविधा।

- आउटसोर्स एजेंसी कर्मचारी के हिस्से के पैसे से सर्विस चार्ज नहीं काट सकेगी।

चुनाव से पहले एक मास्टरस्ट्रोक

चुनाव से पहले अगर उत्तर प्रदेश में इसे लागू कर दिया जाता है तो यह सरकार की बड़ी कामयाबी होगी। इतना ही नहीं, यह सत्तारूढ़ पार्टी के लिए चुनावी मौसम में फायदे का सौदा भी बन सकता है। इसका बड़ा कारण यह है कि वर्तमान में इसे लागू करने के साथ ही लगभग 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को इसका सीधे लाभ मिलेगा। उनके परिवारों को जोड़कर देखा जाए तो कम से कम यह लाभ 17 से 20 लाख लोगों तक पहुंच सकता है। कई बार हमने देखा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्या का एक बड़ा हिस्सा एजेंसी और सरकारी विभाग के बीच फंस कर रह जाती है जिसकी वजह से कर्मचारी अपने विभाग में काम तो करते हैं लेकिन भुगतान के समय उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके लागू हो जाने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत भुगतान को लेकर है। सरकार ने साफ कहा है कि 1 से 5 तारीख के बीच सीधे बैंक खाते में पारिश्रमिक भेजने की पूरी व्यवस्था की जाएगी। इसमें ईपीएफ और ईएसआई का भी अनुदान भी नियमित रूप से किया जाएगा।

क्या होंगी चुनौतियां

भले ही इससे संबंधित पोर्टल और वेबसाइट मुख्यमंत्री और सरकार के द्वारा लॉन्च कर दिया गया है। लेकिन इसे लागू करने में कई सारी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इतने लोगों को एक साथ डिजिटल प्लेटफार्म पर लाना और उनके बीच समन्वय करना एक बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही पुरानी और नई व्यवस्था की जटिलता को खत्म करना भी एक चुनौती है। भले ही सरकार ने इसका ऐलान कर दिया है लेकिन MSMEs और एजेंसियों पर आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि कोई भी कंपनी आउटसोर्सिंग कर्मचारी को मनमाने ढंग से नौकरी से नहीं निकाल सकती। लेकिन निगरानी समिति इसके लिए जरूरी है। जिला और मंडल स्तर पर यह समिति पक्षपात रहित काम करें, यह भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इतना ही नहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि 1 से 5 तारीख के बीच वेतन प्रदान कर देना है लेकिन सरकारी विभागों से मंजूरी मिलना और बिलों को पास करना एक कागजी प्रक्रिया है जो कि कार्यालय में इतना आसान नहीं रहता। ऐसे में समय पर वेतन और भत्ते को दे पाना मुश्किल हो सकता है। आरक्षण नीति का पालन करना इसमें अनिवार्य बनाया गया है। ऐसे में भी यह एक जटिल प्रक्रिया होगी।

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