UP Government ने सख्त किए भर्ती नियम, हिंसक व्यवस्था परिवर्तन वाले नहीं पाएंगे सरकारी नौकरी

UP Government ने सख्त किए भर्ती नियम, हिंसक व्यवस्था परिवर्तन वाले नहीं पाएंगे सरकारी नौकरी
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उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन नियमों में कड़ा संशोधन किया है। प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार हत्या, प्रश्नपत्र लीक और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को अपात्र घोषित किया जाएगा। वहीं केवल प्राथमिकी या जांच लंबित होने पर उम्मीदवारी स्वतः रद्द नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र और पिछले रिकॉर्ड के सत्यापन संबंधी नियम सख्त कर दिए हैं जिसके तहत हिंसक तरीके से ‘समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलने’ का उद्देश्य रखने वाले संगठनों के सदस्यों को राज्य की सरकारी नौकरियों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उप्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत हत्या, बलात्कार, आतंकवादी गतिविधियों, भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक करने और संगठित सॉल्वर गिरोह चलाने जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान किया गया है। प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में 28 अक्टूबर को इस संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए।

ये नियम राज्य सरकार के विभागों के अलावा उसके अधीन निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और शहरी तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी लागू होंगे। आदेश के मुताबिक, हिंसक तरीकों से स्थापित व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से काम करने वाले संगठनों के सदस्य पाए जाने पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी के अयोग्य माना जाएगा। हालांकि, किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा का समर्थक होना अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं होगा।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आदेश के तहत नए नियमों में अपराधों की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें राज्य के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या का प्रयास, दहेज हत्या, यौन अपराध, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अपहरण, मानव तस्करी, लूट, डकैती, संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियों और भीड़ द्वारा हिंसा जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। आदेश के अनुसार परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया में अनुचित साधनों, फर्जी प्रमाणपत्रों, प्रश्नपत्र लीक और सॉल्वर गिरोह से जुड़े मामलों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।

आदेश के तहत सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम से संबंधित कानूनों के तहत आने वाले निर्धारित अपराधों को भी अयोग्यता के दायरे में रखा गया है। आदेश के अनुसार कुछ गंभीर अपराधों में आरोप तय होना ही अयोग्यता का आधार होगा, जबकि अन्य मामलों में दोषसिद्धि आवश्यक होगी। इस प्रकार, अयोग्यता का निर्धारण संबंधित अपराध और उसके लिए तय श्रेणी के मुताबिक किया जाएगा।

दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल प्राथमिकी दर्ज होने या पुलिस जांच लंबित रहने से किसी अभ्यर्थी को स्वत: अयोग्य नहीं माना जाएगा और इसी तरह, बरी हो चुके अभ्यर्थियों, कानूनी रूप से समझौता किए गए मामलों और किशोर न्याय अधिनियम के दायरे में आने वाले मामलों में भी स्वत: अयोग्यता लागू नहीं होगी। आदेश में सरकार ने यह भी कहा है कि 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद चरित्र सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने वाले अभ्यर्थी के मामले में उसकी सक्रिय संलिप्तता की आशंका पर विचार किया जा सकता है, हालांकि, उसके आचरण और सोच में वास्तविक सकारात्मक बदलाव के दस्तावेजी प्रमाणों पर भी विचार किया जाएगा। आदेश के मुताबिक नए प्रावधानों के तहत चरित्र सत्यापन लंबित होने के कारण सामान्य परिस्थितियों में नियुक्ति पत्र रोकना जरूरी नहीं होगा और नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी से निर्धारित सत्यापन प्रपत्र और स्वघोषणा पत्र लेकर औपबंधिक (अस्थायी) नियुक्ति दे सकेंगे और बाद में जानकारी गलत पाए जाने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने पर नियुक्ति रद्द करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकेगी।

आदेश के मुताबिक जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई को सत्यापन संबंधी अनुरोध मिलने के 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी और गृह विभाग इस समयसीमा के पालन की निगरानी करेगा। सामान्य सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी को पूछताछ के लिए घर बुलाने, थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या अतिरिक्त दस्तावेज देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। आदेश के अनुसार अगर पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई की रिपोर्ट प्रतिकूल होती है, तो जिलाधिकारी को अंतिम सिफारिश भेजने से पहले अभ्यर्थी को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा।

आदेश के मुताबिक संवेदनशील पदों या सुरक्षा की दृष्टि से विशेष जांच जरूरी होने वाले मामलों में औपबंधिक नियुक्ति नहीं दी जाएगी और ऐसे मामलों में विस्तृत सत्यापन के बाद ही नियुक्ति की जा सकेगी और इसके लिए संबंधित विभाग को कारणों सहित मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभागों से सेवा संबंधी अभिलेख मंगाए जा सकेंगे।

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