West Bengal में 6 महीने में नाबालिगों के 60,000 प्रसव, Suvendu Adhikari ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय में कैबिनेट बैठक के बाद सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में 30 जून तक छह महीनों में नाबालिग लड़कियों के संस्थागत प्रसव के करीब 60,000 मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए दोषियों पर पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सरकारी लाभ रोके जाएंगे।
कोलकाता, सात सितंबर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि बाल विवाह और नाबालिग लड़कियों के संस्थागत प्रसव के मामलों में पश्चिम बंगाल देश में सबसे आगे है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा तथा उनके सरकारी लाभ रोक दिए जाएंगे। राज्य सचिवालय में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस साल के पहले छह महीनों में, 30 जून तक नाबालिग लड़कियों के संस्थागत प्रसव के 60,000 मामले सामने आए हैं और इनमें मुर्शिदाबाद जिला करीब 13,000 मामलों के साथ सबसे ऊपर है।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इन मामलों का आंकड़ा केंद्र सरकार के साथ साझा नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बाल विवाह और नाबालिग लड़कियों के संस्थागत प्रसव के मामलों में पश्चिम बंगाल देश में सबसे आगे है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक जनवरी से 30 जून के बीच नाबालिग लड़कियों के करीब 60,000 संस्थागत प्रसव के मामले सामने आये हैं।’’ उन्होंने विवरण देते हुए कहा कि अकेले मुर्शिदाबाद जिले में नाबालिग लड़कियों के 12,847 संस्थागत प्रसव के मामले सामने आये, जबकि दक्षिण 24 परगना 4,178 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
उन्होंने कहा कि इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और बच्चों का यौन अपराध से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों को दोषियों के खिलाफ सख्ती से लागू किया जाएगा। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में प्रावधान है कि 21 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले विवाह करने वाले पुरुष और इस अपराध में मदद करने के दोषी पाए जाने वाले लोगों को दो साल तक की जेल या एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। अधिकारी ने कहा, ‘‘पुलिस कार्रवाई शुरू की जाएगी और गिरफ्तारियां की जाएंगी।’’ उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर पॉक्सो के प्रावधान लागू होते हैं, जिनके तहत 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य का स्वास्थ्य विभाग दोषियों, खासकर पति, को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। उसे एक महीने के भीतर दस्तावेजी सबूत देना होगा कि कानून के अनुसार वह और उसकी पत्नी दोनों बालिग हैं। यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, पुलिस महानिदेशक भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हम इन परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ देना बंद कर देंगे।
जिस पुरोहित या काजी ने इस विवाह को औपचारिक रूप दिया है, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की संख्या इतनी अधिक है कि राज्य की सभी जेलें भी दोषियों को रखने में सक्षम नहीं होंगी।
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